Tue. Jun 23rd, 2026

नरकटियागंज: पश्चिम चम्पारण जिला के नगर परिषद नरकटियागंज कार्यालय सभागार में जाति आधारित गणना की सफलता को लेकर, मास्टर ट्रेनरों ने प्रयवेक्षको व प्रगणकों को प्रशिक्षण दिया। जिसका शुभारंभ नगर कार्यपालक पदाधिकारी, उपसभापति, निर्वाचित पार्षद और ट्रेनर ने किया। कार्यपालक पदाधिकारी आमिर सुहैल ने बताया कि जाति आधारित गणना कराना सरकार का निदेेश हैं, उस का पहला चरण गृह गणना सफलता पूर्वक सम्पन्न किया जा चुका है। प्रबुद्धजनों का कहना है कि सरकार की मंशा है कि जिसकी जितनी आबादी हो, उके अनुसार नीति निर्धारित किया जा सके। उपर्युक्त जाति आधारित गणना को सफल बनाने में आमजन की महत्वपूर्ण भूमिका है। घर पहुंचे प्रगणक और पर्यवेक्षक को सहयोग कर पूछे प्रश्न का उत्तर दें। गणना शीट पर हस्ताक्षर भी करें। आपका सहयोग शासन और प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण है। पर्यवेक्षक को ट्रेनिंग दी जा रही है। जाति आधारित गणना को सफल कैसे बनाएं इस संबंध में जानकारी दी गई। मोबाइल एप लोड कराने को कार्यपालक सहायक तैनात किए गए हैं। प्रशिक्षण के दौरान एम. आमीर सुहैल, रितेश कुमार, जय प्रकाश चौरसिया, प्रदीप कुमार व अन्य दृष्टिगत हुए।

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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया