Tue. Jun 23rd, 2026

 

बेतिया: भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी, जिला शाखा बेतिया ने चनपटिया अंचल के बनकट पुरैना पंचायत भवन में बाढ़ पीड़ितों में राहत सामग्री का वितरण किया। उनके लिए नि:शुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन भी किया गया। इस शिविर में वरीय सर्जन डॉ. कुमार शुभम, फिजीशियन डॉ. राजीव रंजन कुमार, डॉ. इरफान, डॉ. जिकरुल्लाह, डॉ. अब्दुल वाहिद, डॉ. इब्तेहाजुल होदा ने 245 मरीजों को परामर्श दिया और रोगियों को निःशुल्क दवाईयां भी उपलब्ध कराई गई।

जिला सचिव डॉ. जगमोहन कुमार ने बताया कि विगत दिनों राज्यपाल सह प्रेसीडेंट, बिहार रेड क्रॉस ने बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत सामग्री की खेप रवाना किया। निर्देशानुसार आवश्यकता परक बाढ़ पीड़ितों में तिरपाल, किचेन सेट, हाईजीन कीट, बाल्टी, कंबल का वितरण किया गया है। इस शिविर एवं वितरण कार्यक्रम में प्रबंध समिति सदस्य अनुज कुमार, रेमी पीटर हेनरी, आजीवन सदस्य अरुण कुमार वर्णवाल, महफूज राजा, कुमार सुरेंद्र कोहली, अजय कुमार यादव, गुलने आरा खातून, नर्सिंग सहायक हिमांशु कुमार, पप्पू पटेल, नसीम अहमद आदि का सराहनीय सहयोग रहा। इस क्रम में उपस्थित सरपंच अख्तर हुसैन, वार्ड सदस्य अवधेश यादव व मो. सलाउद्दीन, युवा साहिल हुसैन, ओसामा उमर, प्रेम कुमार, रामबड़ाई यादव एवं बाढ़ पीड़ितों ने रेड क्रॉस सोसाइटी के इस सहयोग की प्रशंसा की।

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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया