Tue. Jun 23rd, 2026

दुर्ग  जिला पंचायत  की अध्यक्ष शालिनी रिवेंद्र यादव की तबीयत खराब होने से उसकी  मौत हो गई। मंगलवार को अचानक से  उनकी तबीयत अधिक खराब हो गई थी। इसके बाद ग्रीन कॉरडर बना कर उन्हें रायपुर स्थित रामकृष्ण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। पारिवारिक  धागा से मिली जानकारी के अनुसार उन्हें उन्हें अचानक हार्ट अटैक आया था। बताया जा रहा है कि शालिनी यादव का स्वास्थ्य कुछ दिनों से खराब चल रहा था। उनका इलाज दुर्ग के एक निजी अस्पताल में चल रहा था। मंगलवार को   शाम के समय   अचानक उनकी तबीयत अधिक  खराब  गई।

इसके बाद उन्हें चंदूलाल चंद्राकर अस्पताल में भर्ती कराया गया। यहां डॉक्टरों ने उन्हें रायपुर ले जाने की सलाह दी। डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें दिल का दौरा पड़ा है। उसके बाद  तुरंत रायपुर ले जाना होगा। इसके बाद तुरंत दुर्ग पुलिस से संपर्क करके ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया गया। इसके बाद उन्हें महज लगभग 20 से 30  मिनट के अंदर नेहरू नगर से रायपुर रामकृष्ण केयर अस्पताल पहुंचाया गया। यहां कुछ समय तक इलाज के दौरान ही उन्होंने प्राण तोड़ दिया। उनका देह, शरीर ग्राम बोरई ले जाया गया, जहां उनकी अंतिम संस्कार की जाएगी।

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया