Wed. Jun 24th, 2026

सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर शासन व प्रशासन ने पटाखा पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया

रिपोर्ट अनमोल कुमार

पटना। बिहार की राजधानी पटना के साथ चार जिला में पटाखा पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। जी हां, यह बिहार है, बिहार में शराब, पॉलीथिन बैग, गुटखा व मादक पदार्थ पर पहले से पूर्ण प्रतिबंध लगाया जा चुका है। अब सरकार और प्रशासन ने सर्वोच्च न्यायालय व राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देश के आलोक में राज्य के चार नगरीय क्षेत्रों पटना, गया, मुजफ्फरपुर व हाजीपुर, जहाँ विगत वर्ष परिवेशीय वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) खराब, बहुत खराब या गंभीर पायी गयी, वहाँ किसी भी प्रकार के पटाखा उपयोग को पूर्णतः प्रतिबंधित कर दिया गया है। उल्लेखनीय है कि उपर्युक्त आदेश का उल्लंघन अपराध व दण्डनीय है। पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन विभाग, बिहार सरकार व बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद् भी इसके अनुपालनार्थ आदेश दे चुके हैं। जिला प्रशासन पटना ने जिला वासियों से आह्वान किया है कि पर्यावरण-अनुकूल दीपावली मनाएँ, पटाखा का प्रयोग न करें। पटाखा से निकलने वाला धुआँ, जिसमें हानिकारक रसायन होता है, हमारे स्वास्थ्य एवं पर्यावरण को गंभीर क्षति पहुँचाता है। आतिशबाजी व पटाखा में प्रयुक्त बारुद, भारी धातु एवं तथा रसायन के उपयोग से वायु प्रदूषण में अत्यधिक वृद्धि होती है। इससे बच्चों, वृद्ध व्यक्तियों तथा हृदय रोगियों को खतरा होने के साथ-साथ सभी प्राणी को स्वास्थ्य सम्बंधी समस्या हो सकती है। जिला प्रशासन ने निर्देश दिया है कि दीप जलाने में किरासन तेल का उपयोग न करें, क्योंकि इसके जलने से निकलने वाला धुआँ हमारे फेफड़ों को क्षति पहुँचा सकता है। हमारी आँखों में जलन, आँसू एवं धुंधलापन ला सकता है। जिला पदाधिकारी पटना एवं वरीय पुलिस अधीक्षक पटना ने जिलान्तर्गत सभी अनुमंडल पदाधिकारियों तथा अनुमंडल पुलिस पदाधिकारियों को अवैध पटाखों की बिक्री पर रोक लगाने को धावा दल को सतत क्रियाशील रखने तथा दोषियों के विरूद्ध विधि-सम्मत कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया