Mon. Jun 22nd, 2026

छत्तीसगढ़ मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज का 77 वां केन्द्रीय महाअधिवेशन पाटन में हुआ। आयोजन के दुसरा दिन मुख्य अतिथि भूपेश बघेल थे अध्यक्षता केन्द्रीय अध्यक्ष चोवाराम वर्मा ने की कार्यक्रम के संयोजक पाटन राज प्रधान मेहत्तर वर्मा थे। जिसमें प्रतिभावान छात्रों का सम्मान किया गया।

ग्राम पंचायत दैमार निवासी एवं आर्यवर्त हायर सेकेंड़री स्कूल पाटन की छात्रा कुमारी आल्या कक्षा 12 वी में 92 प्रतिशत अंक एवं कुमारी अर्पिता बिजौरा कक्षा 10 वी में 96 प्रतिशत अंक प्राप्त किया। दोनो प्रतिभाशाली छात्रोओ का सम्मान कुर्मी समाज केन्द्रीय अध्यक्ष द्वारा किया गया। इस सम्मान से छात्रा के पिता विनोद बिजौरा माता बसंती बिजौरा बडे पापा ललित बिजौरा बडी माँ श्रीमती अदिति बिजौरा एवं दादा दादी राधेश्याम बिजौरा विमला बिजौरा कुर्मी समाज के प्रति एवं छत्तीसगढ़ कें मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के प्रति आभार व्यक्त किया है।

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया