Tue. Jun 23rd, 2026

अमृत योजना के तहत डाली गई पाइप लाइनों से सड़कें धंस गई हैं। अधिकांश हैंडपंप खराब हालत मे है और लोगों को पेय जल की किल्ल का सामना करना पड़ रह है। यहां बजट के अभाव में पार्क का सौंदर्यीकरण नहीं हुआ है। कई अन्य काम भी पूरे नहीं हुए हैं। श्मशान स्थल का भी सौंदर्यीकरण नहीं हो सका है। उल्लेखनीय है कि शहर के वार्ड नंबर 6 में नाई का नगले व लाला का नगला कुछ हिस्सा आता है। इस वार्ड में अधिकांश इलाकों में समस्याओं का अंबार है। अमृत योजना के तहत डाली गई पाइप लाइन लीकेज के चलते जगह जगह सड़क धंस गई है। गड्ढों में पानी भरा हुआ है। वार्ड में कई हैंडपंप खराब हालत में हैं तो कई रिबोर होने का इंतजार कर रहे हैं। इसके अलावा वार्ड में दशकों पुराना शौचालय मौजूद है, लेकिन आज तक इसकी मरम्मत का काम पूरा नहीं हुआ है। बजट के अभाव में श्मशान स्थल का सौंदर्यीकरण नहीं हुआ है। आंबेडकर पार्क का भी सौंदर्यीकरण नहीं हुआ है। इसके अलावा वार्ड में पानी निकासी के पर्याप्त इंतजाम न होने के कारण ज्यादातर गलियों में बिना बारिश के ही पानी भरा हुआ है। गंदे पानी से संक्रामक रोग फैलने की आशंका बनी हुई है। संवादभोला के दरबार का जलभराव ने रोके रास्ता

-हरीशचंद्र दीक्षित
मेरे वार्ड में कुल 25 सड़कें हैं। इनमें से मात्र 6 सड़कों का निर्माण हुआ है। कई हैंडपंप खराब हालत में हैं या फिर रिबोर का इंतजार कर रहे हैं। भूतेश्वर मंदिर जाने वाले रास्ते पर करीब 5 साल से जलभराव हो रहा है। इसके अलावा अमृत योजना के तहत डाली गई पाइप लाइन लीकेज के चलते सड़क धंस गई है। जलभराव के चलते लोगों का पैदल चलना मुश्किल हो रहा है। बजट के अभाव में श्मशान, आंबेडकर पार्क, शौचालय आदि का सौंदर्यीकरण का काम नहीं हुआ है। 26 लोगों के पीएम आवास बने हैं। विधवा व वृद्धावस्था पेंशन कई महीने से लोगों को नहीं मिल रही है।
-विनोद कर्दम, सभासद वार्ड नंबर छह

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया