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‘सामूहिक वृक्षारोपण कार्यक्रम’ अंतर्गत एसएसबी ने 5800 पौधारोपण

बेतिया: पश्चिम चम्पारण जिला अंतर्गत 44 वाहिनी सशस्त्र सीमा बल नरकटियागंज ने 26 जुलाई 2023 को कारगिल विजय दिवस पर वाहिनी की सभी सीमा चौकियों में ‘सामूहिक वृक्षारोपण कार्यक्रम’ का आयोजन कर 5800 पौधारोपण किया गया। उल्लेखनीय है कि 44 वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल नरकटियागंज ने 26 जुलाई 2023 को कारगिल विजय दिवस पर बटालियन की सभी सीमा चौकियों में ‘सामूहिक वृक्षारोपण कार्यक्रम’ का आयोजन कर 5800 पौधरोपण किया गया। ‘वृक्षारोपण अभियान-2023’ के अंतर्गत उपर्युक्त पौधारोपण किया जा रहा है, जिसमे 44 वाहिनी के अंतर्गत आने वाले सीमावर्ती गांवो, पंचायत भवनों एवं सरकारी संस्थानों में गाँव की जनता के साथ मिलकर ‘सामूहिक पौधरोपण’ किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि वृक्षारोपण अभियान -2023 के अंतर्गत 44 वाहिनी सशस्त्र सीमा बल नरकटियागंज द्वारा इस वर्ष 17000 से भी अधिक बाल वृक्षों का रोपण किया गया है। 44 वाहिनी के कार्यवाहक कमान्डेंट हरिमेन्द्र कुमार दुबे ने बताया कि जल जीवन हरियाली अंतर्गत लगाये गए बाल वृक्ष कल का भविष्य है।

हमें इन पौधों की देख रेख अपने घर के बच्चों के जैसे करनी चाहिए। पौधे कल के ऑक्सीजन का भंडार बन कर हमारे जीवन मे खुशहाली ला सकें। कार्यक्रम के दौरान 44 वाहिनी के पदाधिकारीगण, अधीनस्थ पदाधिकारीगण, अन्य बलकर्मी एवं ग्रामीणों सहित लगभग 350 लोग उपस्थित रहे।

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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया