Wed. Jun 24th, 2026

हिमाचल प्रदेश में कार्गो दुर्घटना में मृत योगापट्टी के मजदूर का शव पहुंचा

बेतिया: हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिला के माजरा थाना अंतर्गत इस्ट कार्गो ट्रांसपोर्ट कंपनी की गाड़ी की शुक्रवार को पेड़ से जोरदार टक्कर में विनय कुमार 24 वर्ष की मौत हो गई। घटना हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिला के माजरा थाना अंतर्गत की बताई गई है। मृतक विनय कुमार हिमाचल प्रदेश में ईस्ट कार्गो कंपनी में कार्यरत रहा। विनय कुमार पश्चिम चम्पारण जिला के योगापट्टी थाना क्षेत्र स्थित रमपुरवा निवासी केदार यादव का पुत्र बताया गया है। सूत्र बताते हैं कि ट्रांसपोर्ट की गाड़ी चंडीगढ़ से देहरादून जाने के क्रम में दुर्घटनाग्रस्त हुई। रही थी। उपर्युक्त दुर्घटना में विनय के सिर में अत्यधिक चोट लगने के कारण उसकी मौत तुरंत हो गई। विनय कुमार का शव शनिवार शाम 6 बजे योगापट्टी के रामपुरवा पहुंचा, उसके शव के पहुंचते उसके घर और गांव में चीख पुकार मच गई। उसकी पत्नी और परिजन बदहाल है, बार बार पत्नी बेहोश होती रही, घर का ऐसा वातावरण मानो पत्थर भी पिघल जाए बन गया। विनय का विवाह 1 वर्ष पूर्व हुआ, उसका 6 माह का 1 पुत्र है।

 

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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया