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आखिर भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर आरक्षण के फार्मूला की आवश्यकता क्यों पड़ी

श्रीराम सेन सिलवानी


नई दिल्ली: ……..आखिर भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर आरक्षण के फार्मूला की आवश्यकता क्यों पड़ी, इसको लेकर वर्चुअल मीटिंग की गई। जिसमें बताया गया कि भारत के संविधान ड्राफ्टिंग कमेटी में 296 लोग थे उसमें मुख्य रूप से डॉक्टर सच्चिदानंद सिन्हा कमेटी के अध्यक्ष थे एवं भारत की प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद जी यह लोग मुख्य रूप से थे आर्टिकल्स 340 में कितनी सभाएं हुई और कितने लोगों ने विचार व्यक्त किया यह सवाल आज भी खड़ा है।

आर्टिकल्स 330 में 332 ,320 ,323,के 15 (4 )16( 4 )यह सारी चर्चा का विषय है 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू हुआ तो दूसरी तरफ उपरोक्त आर्टिकल्स एससी, एसटी को परिभाषित की गई 340 को संविधान लागू के बाद वह कौन लोग थे जो धरना प्रदर्शन करने के लिए ब्रिटिश हुकूमत के पास गए और उन्होंने कहा कि हमें ओपिनियन चाहिए जिससे हमें सारे अधिकार मिल सके।

दिनांक 18 जून 1951 को संविधान में पहला संशोधन हुआ। जिसमें 15 (4) 16 (4) को जोड़ा गया। इस दिनांक को शेड्यूल 9 का फॉर्मूला लाया गया एवं जो भूमिहीन लोगों को भूमि अधिग्रहण आपका अपना संविधान लागू हो गया है। ब्रिटिश हुकूमत ने कहा हमारे पास क्यों आए हो तब लोगों के दिमाग की में आया सोशल मूवमेंट, सामाजिक न्याय, डीवेट में एक साथी ने कहा 340 परिभाषित नहीं किया जाता है, हम आम चुनाव में भाग नहीं लेंगे।
1952 में प्रथम संशोधन हुआ तब चुनाव के बाद 29 जनवरी 1953 पहले काका कालेलकर की अध्यक्षता में आयोग आयोग कमेटी गठन की गई। उसकी रिपोर्ट 30 अप्रैल 1955 में सबमिट की गई। बिहार के बाबू जगजीवन राम को पार्लियामेंट में बिल नहीं रखने दिया तब कल लोगों ने कहा कि यह लोग लड़ाई लड़कर ले लेंगे तब 11 अगस्त 1961 को दसवां संशोधन हुआ और उसमें 14 अगस्त 1961 को एक पत्र जारी किया गया जो भारत के 14 प्रदेशों को भेजा गया और उसे पत्र में कहा गया कि केंद्र सरकार कोई हस्तक्षेप नहीं करेगी और राज्य सरकार के पास अपने-अपने राज्यों में सर्वे कराकर अपने लोगों के हितों में रिपोर्ट जारी करें। जिसमें पिछड़े वर्ग का उल्लेख (चर्चा) है। बिहार के जननायक कर्पूरी ठाकुर प्रथम चुनाव ताजपुर विधानसभा से जीत कर आए और उनको महसूस हुआ कि हम कैसे आए, तब 1930 और 31 में जाति आधारित पर खतियान बना, दूसरी तरफ 6 अगस्त 1930 को डॉ भीम राव अम्बेडकर का प्रथम पत्र प्राप्त हुआ। 17 सितंबर 1930 को पहला सम्मेलन दूसरी 12 सितंबर 1931 में हुआ। तीसरा 20 सितंबर 1932 को हुआ। जिसमें बाबा साहब का सवाल, संघीय लोक पालिका, संघीय विधान पालिका एवं कार्यपालिका, राजकीय सेवाओं में रिप्रेजेंटेड करें या प्रतिनिधित्व की गारंटी सुनिश्चित होनी चाहिए, सेपरेट इलेक्ट्रॉल का अधिकार हो। उपर्युक्त संघीय विधान पालिका, संघीय लोक पालिका, कार्यपालिका मैं हम अनटचेबल हैं, ब्रिटिश हुकूमत के द्वारा बिहार की पटना हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस डीएफडी मिलर ने बिहार उड़ीसा ,बंगाल, मुंबई प्रेसिडेंशियल में सभी लोग डिप्रेस्ड क्लास के नाम से संबोधित करते थे अनटचेबल्स और टचेबल ब्रिटिश हुकूमत ने कमीशन अवार्ड के रूप में मंजूरी मिली। 24 सितंबर 1932 से लेकर 1935 के बीच में नया शेड्यूल बना। जिसमें सूची जारी की एससी की सूची बनी कहां से और ली गई, जाति जनगणना कहा से आया। यह भी एक सवाल है ? 1930 और 31 इंडियन एक्ट 1935 बना, जिसमें सारी मांग मानी गई। दूसरी तरफ आर्टिकल्स 340 जो संविधान में लिखी गई, वह गोलमेज सम्मेलन में टचेबल ब्रिटिश हुकूमत डिप्रेस्ड क्लास अर्थात पोस्ट की सेवा पर आधारित है। इस तरह से कई लोगों के विकास के बारे में कोई शिड्यूल नहीं बन पाया, कोई लिस्ट तैयार नहीं हो पाया और 340 संविधान में जोड़ दिया, जब इसकी कोई परिभाषा नहीं तो पिछड़े वर्ग को नामकरण कैसे आया……. यह यक्ष प्रश्न है?

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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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