Wed. Jun 24th, 2026
बेतिया : पश्चिम चम्पारण जिला मुख्यालय बेतिया स्थित जिला निबंधन एवं परामर्श केंद्र (डीआरसीसी) परिसर में शुक्रवार को जॉब कैंप का आयोजन किया गया है। श्रम संसाधन विभाग जिला नियोजनालय के तत्वाधान से नियोजन शिविर शुक्रवार की सुबह के 11 बजे से शाम 4 बजे तक संचालित रहेगा । इच्छुक अभ्यर्थी जॉब कैंप में नियोजक से जॉब के विषय में जानकारी प्राप्त कर आवेदन और बायोडाटा जमा कर सकते हैं। जिला पदाधिकारी के निर्देश पर नियोजन शिविर का आयोजन किया गया है। जिला नियोजन पदाधिकारी अंकित राज के अनुसार डीएम दिनेश कुमार राय के निर्देश में लगातार जॉब कैंप का आयोजन कर बेरोजगार युवक-युवतियों को रोजगार उपलब्ध कराने का कार्य किया जा रहा हैं। इसी क्रम में शुक्रवार को जॉब कैंप का आयोजन किया गया है।
उन्होंने बताया कि बीते 31 जनवरी, 7 फरवरी, 14 फरवरी और 15 अप्रैल, 28 अप्रैल और 21 जुलाई को जॉब कैंप का आयोजन किया गया। इसमें कई महिला-पुरुष अभ्यर्थियों का चयन किया गया। एक बार फिर शुक्रवार 28 जुलाई 2023 को जॉब कैंप का आयोजन किया गया है। उन्होंने बताया कि डी.एस.इ.टी.एस. प्राइवेट लिमिटेड कंपनी गुजरात में प्रोडक्शन ट्रेनी के पद के लिए 30 अभ्यर्थियों का चयन करेगी। उन्होंने बताया कि निजी नियोजक, पद, योग्यता, उम्र, मानदेय, रिक्ति, कार्यस्थल की विस्तृत जानकारी का प्रचार-प्रसार कराया गया है। जिससे लक्ष्य के अनुरूप बेरोजगार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराई जा सके।
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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया