Wed. Jun 24th, 2026

बिहार राज्य आशा संघ एटक पश्चिम चम्पारण का सीएस के समक्ष प्रदर्शन


बेतिया: बिहार राज्य आशा संघ एटक पश्चिम चम्पारण ने 16 सूत्री मांगों को लेकर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी के समक्ष विशाल प्रदर्शन किया। उपर्युक्त प्रदर्शन में आशा, आशा फैसलिटेटर, ममता, कुरियर, संविदा की एएनएम शामिल रही। प्रदर्शनकारी बेतिया बलिराम भवन से जुलूस के रुप में निकल कर बेतिया के विभिन्न मार्गो से होते हुए, सिविल सर्जन कार्यालय पहुचे, जहाँ प्रभारी सीएस एवं आशा डीसीएम को मांग पत्र सौपते हुए 28 जुलाई 2023 से हड़ताल में जाने की घोषणा किया। आशा, आशा फैसलिटेटर, ममता, कुरियर, संविदा के एएनएम की सेवा स्थायी करने, सेवा निवृत्ति के बाद एक मुश्त 10 लाख रुपये का भुगतान करने, सेवा अवधि में मृत्यु होने पर अनुकम्पा का लाभ देने, सेवा निवृत्ति की उम्र 65 वर्ष करने, कमीशन के बदले मानदेय देने, मृत आशा के परिजनों को 4 लाख की जगह 10 लाख का भुगतान करने, आशा के ड्रेस की राशि 1150 से बढाकर 2000 हजार रुपए करने, कोरोना काल के प्रोत्साहन राशि का भुगतान करने, आशा, एएनएम, आशा फैसलिटेटर को मूल्यांकन के नाम पर प्रताड़ित करने पर रोक लगाने की मांग कर रहे दिखे। प्रदर्शन का नेतृत्व बिहार प्रदेश के कार्यकारी अध्यक्ष ओम प्रकाश क्रांति, साधना देवी, बेनू देवी, पुष्पा देवी, सरोज, रंजना, शबनम खातून, रंजीता देवी, सरोज, राधामोहन यादव, केदार चौधरी, बब्लू दूबे, परशुराम ठाकुर, देवेन्द्र नाथ, कुमुद ने किया। आशा सरकार से आर पार की लड़ाई लडने के मूड में हैं, प्रांतीय कार्यकारी अध्यक्ष ओम प्रकाश क्रांति ने आशा से अनुशासन में रह कर अपने अधिकार के लिए आंदोलन करने का आह्वान किया।

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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया