Wed. Jun 24th, 2026

बैगलेस सुरक्षित शनिवार के अंतर्गत जुलाई माह की थीम “मैं हूं स्वच्छता प्रेमी” में स्वच्छता की जानकारी

APNI BAT

पटना: बिहार की राजधानी पटना स्थित शैक्षणिक अंचल गुलजारबाग के राजकीयकृत नवसृजित प्राथमिक विद्यालय दादरमंडी में बैगलेस सुरक्षित शनिवार के अंतर्गत जुलाई माह की थीम “मैं हूं स्वच्छता प्रेमी” के साफ-सफाई एवं स्वच्छता से सम्बंधित विभिन्न प्रकार की जानकारियां तथा बरसात के मौसम में पटना में डेंगू मच्छर के प्रकोप से बचने, डेंगू के लक्षण व उपचार सम्बंधित जानकारी शिक्षक सूर्य कान्त गुप्ता ने विद्यार्थियों को विस्तृत रूप से दिया। श्री गुप्ता ने बताया कि अभी बरसात का मौसम है। यत्र यत्र जल जमाव हो रहे हैं, जिसमें डेंगू सहित अन्य प्रकार के मच्छरों के लार्वा विकसित होते हैं। पटना में स्थिति अति गंभीर है। डेंगू से बचने के लिए हमें कूलर पानी की टंकी, पक्षियों के पीने की पानी का बर्तन, फ्रिज की ट्रे, फुलदान को प्रति सप्ताह खाली करना चाहिए तथा धूप में सुखाकर प्रयोग करना चाहिए। नारियल के खोल, टूटे हुए बर्तन, पुराने टायरों में पानी जमा नहीं होने दें। घरों के दरवाजे व खिड़कियों में जाली और परदे लगाएं। घर के आसपास पानी जमा नहीं होने दें। जमा पानी में किरासन तेल या एंटी लार्वा का छिड़काव करें। मच्छरदानी का उपयोग करें, फूल कपड़े पहनें। नगर निगम पार्षद से फॉगिंग करवाने को कहें। डेंगू के लक्षण में अचानक तेज सिर दर्द व तेज बुखार आना, मांसपेशियों एवं जोड़ों में दर्द रहना, आंखों के पीछे दर्द होना, आंखों को घुमाने से दर्द होना, जी मिचलाना, उल्टी होना, गंभीर मामलों में नाक मुंह मसूड़ों से खून आना, त्वचा पर चकत्ते उभरना हैं। डेंगू होने पर तत्काल नजदीकी चिकित्सक से संपर्क करें। तरल पदार्थ का सेवन करें। नारियल डाभ का सेवन काफी लाभदायक होता है। विद्यालय के प्रधान शिक्षक जीतेंद्र कुमार ने भी साफ-सफाई की महत्ता पर प्रकाश डाला एवं गंदगी से होने वाले विभिन्न रोगों के बारे में जानकारियां दी

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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया