Wed. Jun 24th, 2026
  1. बिहार में विधान सभा मार्च के क्रम में लाठी चार्ज, लोकतंत्र की हत्या : धरम सिंह

पटना: भारतीय जनता पार्टी ने 13 जुलाई 2023 को विधानसभा मार्च निकाला। जिसमें बिहार सरकार के पुलिस ने जिस प्रकार लाठीचार्ज किया। उसे लोकतंत्र की हत्या करार दिया है। इस कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता की मृत्यु हुई। इसका हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिकित्सा प्रकोष्ठ धरम सिंह एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ कृष्ण किशोर, महासचिव डॉ अभिषेक, प्रदेश अध्यक्ष चिकित्सा प्रकोष्ठ डॉ ज्योति रंजन व कार्यकर्तागण घोर निंदा करते है। मृतक के परिवार को सरकारी नौकरी उच्च स्तरीय जांच करा कर लाठीचार्ज करने वाले पुलिस की पहचान कर उचित करवाई एवं परिवार के भरण पोषण के लिए सरकार से परिवार के सदस्य को सरकारी नौकरी और 1 करोड़ रुपया देने की मांग किया है। हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा सेकुलर के चिकित्सा प्रकोष्ठ के राष्टीय अध्यक्ष धरम सिंह ने कहा कि इस प्रकार लाठी चार्ज, जब लाला लाजपत राय ने आंदोलन किया तब अंग्रेजों ने चलवाया, वर्तमान सरकार बिल्कुल तानाशाही रवैया अपनाकर संविधान की धज्जियां उड़ाकर सड़क पर तांडव मचा रही है। उसकी निंदा जितनी किया जाय कम होगी। हम का कहना है कि पूरे देश को बिहार ने शर्मसार किया है। हम पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिकित्सा प्रकोष्ठ के तरफ से मांग है बिहार में तत्काल राष्ट्रपति शासन लगाया जाए। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को और उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिए।

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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया