Wed. Jun 24th, 2026

 

बेतिया : पश्चिम चम्पारण जिला के बगहा पुलिस अंतर्गत भैरोगंज थाना क्षेत्र के एक गांव में किशोरी से दुष्कर्म मामला का फरार आरोपी बिहारी दूबे को महिला थाना पुलिस ने घटना के चौबीस घंटे में गिरफ्तार कर लिया है। बगहा एसपी किरण कुमार गोरख जाधव ने बताया कि 30 जून 2023 को पीड़िता ने महिला थाना में प्राथमिकी दर्ज कराया। जिसमें आरोप यह कि किशोरी गांव के कथित चाचा के घर नौ महीने से घर में चुल्हा- चौका का काम करती रही। उसी क्रम में बिहारी दूबे 50 वर्ष बहला फुसला कर उसके साथ लगातार शारीरिक संबंध स्थापित करता रहा, जब वह पांच माह की ग़र्भवती हुई तो उसके परिजनो ने उसके गर्भ के सम्बंध में पूछताछ किया, तो जानकारी मिली कि बिहारी दूबे ने उपर्युक्त कार्य को अंजाम दिया है। जिसकी जानकारी बिहारी दूबे की पत्नी एजवारी देवी व उसकी बहन रागनी देवी को रही, लेकिन दोनों महिलाओं ने किशोरी को डराया-धमकाया जाता रहा, कि अगर किसी को कुछ बतायी तो जान मार दिया जायागा। उसके बाद पीड़िता (किशोरी) के स्वजन बिहारी दूबे के घर पूछताछ के लिए गए तो बिहारी दूबे घर छोड़ फरार हो गया। उसकी पत्नी व बहन ने किशोरी के स्वजन के साथ गाली-गलौज करते हुए घर से भगा दिया, धमकी भी दी गई। उसके बाद नाबालिग(किशोरी) को लेकर उसके स्वजन शनिवार को महिला थाना पहुंचे, जहां उसके बयान पर प्राथमिकी दर्ज कर थानाध्यक्ष धर्मवीर कुमार भारती पुलिस टीम के साथ आरोपी के घर पहुंचे, परंतु आरोपी घर छोड़ कर फरार बताया गया। उसके उपरांत रात में फिर उसके घर छापामारी की गई, जहां से आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय को सुपुर्द कर दिया गया है।

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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया