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प्राथमिक कृषि साख सहयोग समिति (पैक्स) के प्रतिनिधियों एवं कृषकों के लिए खेत बचाव अभियान सम्मेलन का आयोजन


पटना : भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना तथा इसके अधीनस्थ केंद्र कृषि विज्ञान केंद्र, बक्सर में दिनांक 05 जून 2026 को राष्ट्रव्यापी खेत बचाओ अभियान के अन्तर्गत विश्व पर्यावरण दिवस पर प्राथमिक कृषि साख सहयोग समिति (पैक्स) के प्रतिनिधियों एवं कृषकों का एक सम्मेलन सम्पन्न हुआ। इस कार्यक्रम में पैक्स अध्यक्ष/प्रबंधक/सदस्य एवं कृषकों सहित 90 से अधिक लोगों ने भाग लिया। इसका मुख्य उद्देश्य प्राथमिक कृषि समिति के सदस्यों को उर्वरकों के संतुलित प्रयोग को एक अभियान का रूप देना तथा समेकित पोषक तत्व प्रबंधन, प्राकृतिक खेती और अन्य टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना है।
कार्यक्रम में पैक्स के सदस्यों ने उर्वरकों को समय से उपलब्ध कराने की बात कही। साथ ही यूरिया एवं डी.ए.पी. के स्थान पर मिश्रित उर्वरक जैसे- 20:20:0:13 (एन.पी.के.एस.), 12:32:16 (एन.पी.के.), 19:19:19 (एन.पी.के.), 0:0:50 (एन.पी.के.), नैनो डी.ए.पी. (16:8), आदि उर्वरकों को उचित मूल्य पर प्रत्येक पैक्स में उपलब्ध कराने पर जोर दिया। कृषकों ने पराली प्रबंधन को अपने-अपने गाँव में एक अभियान के रूप में जागरूक करने के लिए सहमति जताई। महिला कृषकों ने विभाग द्वारा समय पर उन्नत किस्म के बीज उपलब्ध कराने पर जोर दिया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि जिला सहकारिता पदाधिकारी चन्द्रमा राम ने लोगों को सहकारिता विभाग द्वारा संचालित विभिन्न किसान कल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी देते हुए इससे ज्यादा से ज्यादा लाभ लेने की बात कही।
आई.सी.ए.आर. पटना के सामाजिक-आर्थिक एवं प्रसार प्रभाग के प्रमुख डॉ. उज्ज्वल कुमार ने कृषकों को मिट्टी जाँच के उपरांत ही उर्वरकों के संतुलित मात्रा में प्रयोग करने की शपथ दिलाई। उन्होंने पोषक तत्व प्रबंधन के लिए ‘Four R (4Rs)’ सिद्धांत की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि खेत में सही स्रोत (Right source), सही मात्रा (Right quantity), सही विधि (Right method) और सही समय (Right time) पर ही उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने मूँग, ढैंचा, लोबिया, आदि फसल को हरी खाद के रूप में प्रयोग कर खेत को उर्वर बनाने की बात कही तथा यूरिया एवं डी.ए.पी. रासायनिक उर्वरकों को 15-20 प्रतिशत तक कम प्रयोग करने की सिफारिश की।
वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. विश्वजीत देवनाथ ने टिकाऊ कृषि के लिए उन्नत तकनीकी जैसे- जैविक एवं प्राकृतिक खेती को अपनाने की बात कही। कृषि विज्ञान केन्द्र, बक्सर के वरिष्ठ वैज्ञानिक सह प्रमुख डॉ. देवकरन ने मृदा स्वास्थ्य कार्ड के महत्व एवं उपयोग तथा वर्षा जल संरक्षण की तकनीकी जानकारी दी। कार्यक्रम के माध्यम से महिला एवं पुरुष किसानों को किचेन गार्डन को सब्जी किट उपादान सहयोग किया गया। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर लीची का वृक्षारोपण किया गया। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास ने अपने संदेश में विश्व पर्यावरण दिवस की बधाई देते हुए कहा कि मिट्टी के स्वास्थ्य की रक्षा करना वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। पैक्स प्रतिनिधि और किसान मिलकर प्राकृतिक व वैज्ञानिक खेती के तौर-तरीकों को अपनाएं ताकि हम पर्यावरण को सुरक्षित रखते हुए आने वाली पीढ़ियों के लिए कृषि को टिकाऊ बना सकें।

इस अवसर पर चौसा के प्रखण्ड सहकारिता पदाधिकारी मनोज कुमार, पैक्स प्रतिनिधि मुकेश कुमार सिंह, रिंकु राय, पप्पू यादव, चंदन कुमार सिंह, लालजी साह, मंजय कुमार यादव, नवनीत कुमार उपाध्याय, नागेन्द्र प्रसाद, राजू ओझा तथा उषा कुमारी, विंदेश्वरी देवी, ललन राम, ज्योति प्रकाश, सावित्री देवी, रिंजु देवी, रमावती देवी, सरस्वती देवी ने संतुलित उर्वरक प्रबंधन और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए अपने-अपने विचार व सुझाव साझा किया।

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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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