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पूर्वी भारत की कृषि को सशक्त बनाने पर विशेषज्ञों ने बल दिया

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पटना : भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का 98 वाँ स्थापना दिवस व पूर्वी अनुसंधान परिसर पटना में 23 जुलाई 2026 को 22 वीं अनुसंधान सलाहकार समिति की बैठक सम्पन्न हुई। जिसका उद्देश्य संस्थान की अनुसंधान उपलब्धियों की समीक्षा तथा पूर्वी भारत विशेषकर बिहार और झारखंड के किसानों के लिए उपयोगी अनुसंधान एवं नई कृषि तकनीक को बढ़ावा देने के लिए सुझाव प्राप्त करना रहा है। बैठक की अध्यक्षता एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्व उप महानिदेशक (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन) डॉ. ए. के. सिंह ने किया और कहा कि लघु और सीमांत किसानों के लिए जलवायु-अनुकूल, संसाधन का उत्तम उपयोग करने वाली तथा किसान-केंद्रित तकनीक का विकास समय की आवश्यकता है। उन्होंने जल उपयोग दक्षता, पोषक तत्व उपयोग दक्षता, अम्लीय मृदा पर अनुसंधान तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सहायक महानिदेशक (प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन) डॉ. राकेश कुमार ने संस्थान की उपलब्धियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि भविष्य के अनुसंधान राष्ट्रीय प्राथमिकता के अनुररुप होने चाहिए। उन्होंने जलवायु-स्मार्ट गाँव के विकास, कोयला खनन से प्रभावित क्षेत्रों का पुनुरुद्धार तथा लघु किसानों के लिए उपयोगी तकनीक के विकास पर बल दिया।
आरएसी के अन्य सदस्यों डॉ.सी.एल.आचार्य (पूर्व निदेशक भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान भोपाल, डॉ. आजाद सिंह पंवार (पूर्व निदेशक भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान मोदीपुरम, डॉ. रंजीत कुमार (प्रधान वैज्ञानिक, राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंधन अकादमी हैदराबाद, डॉ. महेश गाथाला (वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं सिस्टम्स एग्रोनॉमिस्ट समिट) तथा डॉ.के.के.बरुआ पूर्व प्रभागाध्यक्ष, पूर्वोत्तर पर्वतीय क्षेत्र अनुसंधान परिसर, उमियाम ने भी संस्थान के अनुसंधान एवं प्रसार कार्यक्रमों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिया। संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास ने सभी अतिथि का स्वागत करते हुए संस्थान की प्रमुख उपलब्धियों, प्रगतिशील अनुसंधान कार्यों तथा भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने अपने सम्बोधन में कहा कि संस्थान केवल गुणवत्तापूर्ण कृषि अनुसंधान तक ही सीमित नहीं है, बल्कि विभिन्न प्रसार एवं क्षमता निर्माण गतिविधियों के माध्यम से विकसित एवं प्रमाणित प्रौद्योगिकियों को प्रभावी ढंग से किसानों के खेतों तक पहुँचाने के लिए भी पूर्णतः प्रतिबद्ध है। बैठक से पहले अनुसंधान सलाहकार समिति के सदस्यों ने संस्थान के वैज्ञानिकों के साथ धान की रोपाई की। इसके बाद उन्होंने संस्थान के अनुसंधान प्रक्षेत्र का भ्रमण कर समेकित कृषि प्रणाली, प्राकृतिक खेती, धन-परती भूमि प्रबंधन, पोषण वाटिका, ओपन टॉप चैंबर, विभिन्न अनुसंधान गतिविधि का अवलोकन किया। इस क्रम में उन्होंने आम और अमरुद का पौधा भी लगाया। सदस्यों के लिए संस्थान विकसित तकनीक एवं उत्पाद की प्रदर्शनी भी लगाई गई। कार्यक्रम के क्रम में चार प्रकाशन का पुस्तक विमोचन भी किया गया। कृषि अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन को सूक्ष्मजीवी इनोकुलेशन कल्चर के उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जी-बायोम प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया गया।
तकनीकी सत्र में संस्थान के विभिन्न प्रभाग तथा बक्सर एवं रामगढ़ स्थित कृषि विज्ञान केंद्रों के प्रमुख ने अनुसंधान उपलब्धियों, नई तकनीक, कृषि प्रसार कार्य और आगामी योजना की जानकारी प्रस्तुत की। कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन अनुसंधान सलाहकार समिति के सदस्य सचिव डॉ.पी.सी.चंद्रन ने किया।

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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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