Wed. Jun 24th, 2026

 

लौरिया। पश्चिम चम्पारण जिला के नरकटियागंज अनुमंडल अंतर्गत नगर पंचायत लौरिया स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लौरिया का सिविल सर्जन डॉ श्रीकांत दुबे ने औचक निरीक्षण किया। तीसरी बार निरीक्षण के दौरान सिविल सर्जन डॉ श्रीकांत दुबे ने उपस्थित पंजी जांच किया। अस्पताल में अनुपस्थित कर्मियों एवं पदाधिकारियों की उपस्थिति रद्द किया।निरीक्षण के दौरान तीनों चिकित्सा पदाधिकारी अनुपस्थित पाए गए।  जिनमें प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डा दिलीप कुमार,डा कुमार सचिन किशोर एवं डा जीतेन्द्र काजी का नाम शामिल हैं। ओपीडी में डा एस एम खुर्शीद एवं डा शमीम ड्युटी पर कार्यरत पाए गए। सीएस ने टीकाकरण अभियान सहित अन्य आवश्यक जानकारी संबंधित पदाधिकारियों से विस्तृत जानकारी ली। सी एस ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बगैर ड्युटी हमेशा उपस्थित रहने वाले डा अफरोज के शिकायत पर बताया की डा अफरोज को यहां से हटाने को सीएस ज़िला पदाधिकारी को पत्र लिखेंगे। सीएस ने बताया की स्वस्थ सेवाएं में कोई कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।ड्युटी पर लापरवाही करने वालों पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

मौके पर अस्पताल प्रबंधक राहुल कुमार प्रधान सहायक राजन कुमार संत भास्कर ओटी एसिस्टेंट विजय कुमार सहित अन्य उपस्थित रहे।

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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया