Wed. Jun 24th, 2026

बेतिया : पश्चिम चम्पारण जिला अंतर्गत वाल्मीकिनगर
सांसद सुनील कुमार ने तेलपुर के मसान नदी के कटाव का निरीक्षण मंगलवार को किया। देवराज के तेलपुर के पश्चिम और दक्षिण टोला में हो रहे मसान नदी के कटाव का निरीक्षण के दौरान वहां के ग्रामीणों को आश्वस्त करते हुए कहा कि मसान नदी से अब कटाव नहीं होगा। इसे दुरुस्त करने का पहल यथाशीघ्र कर लिया जाएगा। मंगलवार को वाल्मिकीनगर सांसद श्री कुमार ने तेलपुर में हो रहे कटाव का निरीक्षण करते हुए उपर्युक्त विचार व्यक्त किया। उन्होंने कटाव स्थल से ही कार्यपालक अभियंता चंदन कुमार को फोन कर स्थल पर बुलाया। सांसद ने उन्हें बताया कि यहां के ग्रामीण जेसीबी मशीन से खुदाई कर मसान नदी को पुराने जगह पर पहुंचाने का प्रयास किए है,जो बहुत ही सराहनीय कदम है। उन्होंने सुलीस गेट लगाने को कहा ताकि कटाव न हो और कटाव स्थल पर बोरे में बालू भरकर बांधने के लिए अभियंता से अपील की।मौके पर सिसवनिया पंचायत के मुखिया कन्हैया प्रसाद कुशवाहा, प्रखंड अध्यक्ष विक्रम शर्मा, हिमांशु कुमार, विक्रामा महतो आदि के साथ ग्रामीणों में एजाज अहमद, मास्टर रेयाज अहमद, इंजीनियर उमर अब्दुल्लाह,तौकीर आलम जहीर मियां व उपस्थित रहे। उपर्युक्त जानकारी सांसद के अनुमंडल मीडिया प्रतिनिधि केदार प्रसाद ने दी।

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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया