Wed. Jun 24th, 2026

बेतिया। जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय के समक्ष कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय के शिक्षक व कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल व धरना कार्यक्रम प्रारम्भ किया है। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय इम्पलाईज युनियन की अध्यक्ष संतू बाला ने अनिश्चितकालीन हड़ताल व धरना को सम्बोधित करते हुए कहा कि उन्हें बार-बार आश्वासन दिया जाता है कि वेतन बढ़ाया जायेगा। उसके साथ ही अन्य सुविधाएं विभाग द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी। अलबत्ता आश्वासन के अतिरिक्त उन्हे कुछ नहीं मिलता है। हम लोग इसके पहले कलेक्ट्रेट गेट पर एक दिवसीय धरना दे चुके हैं, लेकिन उनकी एक भी मांगों को पूरा नहीं किया गया। विभाग के कान पर जूं तक नहीं रेंग रहा है। उन्होंने कहा कि जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय के गेट पर अनिश्चितकालीन हड़ताल व धरना पर हैं। श्रीमती बाला ने कहा है कि उनकी 15 सूत्री मांगों को नहीं पूरा किया जाता है तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल व धरना जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि तत्काल प्रोजेक्ट एप्रूवल बोर्ड निर्धारित अप्रैल का वेतन भुगतान, तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। अब तक का अंतर वेतन बकाया भुगतान किया, वेतन बढ़ोतरी का प्रस्ताव समग्र शिक्षा कार्यक्रम के वार्षिक कार्य योजना एवं बजट 2022 में रखते हुए अनुमोदन के लिए, भारत सरकार से अनुरोध किया जाए। बिहार सरकार के निर्णय के आलोक में बिहार शिक्षा परियोजना परिषद के कर्मियों के बाद राज्य का के. जी. बी. वी. कर्मियों की सेवा भी 65 वर्ष की आयु तक 2018 के प्रभाव से विस्तृत किया जाए। कर्मियों के मृत्यु उपरांत उनके आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी और कम से कम ₹4 लाख अनुदान राशि दी जाए। वार्डन के रिक्त पदों पर प्रभारी वार्डन एव अंशकालिक शिक्षिका के रिक्त पदों पर व्यवसायिक प्रशिक्षण अनुदेशिका समाजित किया जाए। इस दौरान मनोज कुमार ने कहा कि सभी कर्मियों की सेवा पुस्तिका संधारित की जाए। बिहार शिक्षा परियोजना परिषद के कर्मियों के समान सभी प्रकार के अवकाश यथा यात्रा, आकस्मिक अवकाश, अर्जित अवकाश, मातृत्व अवकाश, पितृत्व अवकाश, नियत पारिश्रमिक कर्मी जो लंबे समय से कार्यरत है, उन्हें स्थाई करने,कस्तूरबा गांधी विद्यालय की कर्मियों को सामूहिक बीमा करने, कर्मचारी भविष्य निधि की सुविधा कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय कर्मियों को योगदान तिथि से प्रबंध करने की मांग किया। धरना में सचिव शिवजी कुमार, मनोज कुमार, शिल्पी, रानी देवी, रिंकी कुमारी, तरीजन खातून, संतोषी देवी, सोना कुमारी, रंजना कुमारी, उषा देवी, लेखापाल आदित्य मिश्र, अजय कुमार, प्रेम कुमार, रसोईया, वार्डन, शिक्षिका, रात्री प्रहरी, आदेशपाल शामिल रहे।

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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया