Wed. Jun 24th, 2026

 

बेतिया : पश्चिम चम्पारण जिला के बैरिया प्रखंड क्षेत्र के सूर्यपुर पंचायत अंतर्गत उत्क्रमित मध्य विद्यालय कोईरपट्टी में एमडीएम के चावल को बेचने की तैयारी के मंसूबों पर ग्रामीणों ने पानी फेर दिया है। सूत्रों ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानाध्यापक मधुभूषण पासवान ने एमडीएम का 5 बोरा चावल चोरी कर बगल के पुराने भवन में रखे जलावन की लकड़ी वाले कक्ष में चोरी से छुपा कर रखा, जब ग्रामीणों की नजर पुराने भवन में रखे चावल के बोरा पर पड़ी तो ग्रामीणों ने जमकर हंगामा किया।ग्रामीण ने बताया कि इससे पूर्व प्रधानाध्यापक ने एमडीएम का चावल झोला में भरकर साइकिल में लटकाकर विद्यालय से चावल बेचा जाता रहा है। जब झोला से चावल बेंचने से उनका मन नहीं भरा तो अब एमडीएम के चावल का बोरा बेचना प्रारम्भ किया है। उनके कारगुज़ारी रुपी पाप का घड़ा भर चुका, ग्रामीणों की नजर जब पुराने विद्यालय के भवन पर पड़ी तो देखा गया की जलावन की लकड़ी से चावल का बोरा को ढककर रखा गया है। जिसको लेकर ग्रामीण ने घंटो बवाल मचाया, सोसल मीडिया पर वीडियो वायरल किया। उपर्युक्त विद्यालय में जब संवाददाता पहुंचा तो विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने पहले प्रधानाध्यापक बनने से इंकार किया, अंततोगत्वा उन्होंने धीरे स्वर में बताया कि वे ही प्रधानाध्यापक हैं। विद्यालय में देखा गया कि जिस वर्ग में बच्चे पढ़ रहे हैं। वहां चूहे का जगह जगह बिल है जिससे कभी भी अनहोनी की घटना बच्चो के साथ घट सकती है । विद्यालय में पढ़ रहे बच्चो से पूछा गया तो बच्चो ने दबी जुबान से कहा कि, स्वच्छ पानी एवं शौचालय की व्यवस्था नहीं होने पर गांव के पुराने मुखिया के दरवाजे से पानी और शौच करने के लिए खुले मैदान (सरेह) में जाते है। विद्यालय के प्रधानाध्यापक किसी भी वर्ग में कभी भी नहीं पढ़ाते हैं।विद्यालय के प्रत्येक क्लासरुम में गंदगी फैली हुई है। विद्यालय का जो स्टोर रुम है, उसकी चाबी रसोईया के पास रहता है। इस बाबत प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी उमेश कुमार से बात किया गया, तो उन्होंने बताया कि जांच कर उचित करवाई कार्रवाई की जाएगी।

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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया