Thu. Dec 1st, 2022

इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) में छात्रों ने मंगलवार को भूसमाधि लेने की कोशिश की। पुलिस ने उन्हें रोका तो छात्रों और पुलिस के बीच झड़प हो गई। इस बीच जनता दल यूनाइटेड (जदयू) और अधिवक्ता ने अनशन स्थल पर पहुंचकर छात्रों के आंदोलन को अपना समर्थन दिया और एबीवीपी की ओर से प्रधानमंत्री एवं राष्ट्रपति को तीन हजार पोस्टकार्ड भेजे गए।

संयुक्त संघर्ष समिति की ओर सेज ारी आमरण अनशन के दौरान मंगलवार को छात्रों फीस वृद्धि के विरोध में भूसमाधि लेने की कोशिश की। छात्रों ने अनशन स्थल के पीछे गड्ढा खोदा और उसमें कूद पड़े। सामने पुलिस फोर्स मौजूद थे। पुलिस ने छात्रों को गड्ढे से बाहर निकला और वहां से हटा दिया। इस दौरान छात्रों और पुलिस के बीच झड़प भी हुई। इस बीच जदयू प्रदेश उपाध्यक्ष एवं प्रदेश भारी सत्येंद्र पटेल के नेतृत्व में पहुंचने प्रतिनिधिमंडल ने अपना समर्थन देते हुए कहा कि वे पूरी तरह से छात्रों के साथ हैं। छात्रों से कहा कि राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देश पर प्रतिनिधिमंडल यहां आया है। जल्द ही बिहार के मुख्यमंत्री एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष नितीश कुमार का भी समर्थन मिलेगा। फीस वृद्धि वापस नहीं हुई तो नौ अक्तूबर को बिहार से जदयू के सांसदों एवं विधायकों का प्रतिनिमंडल आएगा। इस दौरान छात्रसंघ भवन के सामने अनशन स्थल पर हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता केके राय एवं राजवेंद्र सिंह के नेतृत्व में दर्जनों अधिवक्ता पहुंचे और उन्होंने आंदोलन को अपना समर्थन दियावहीं, एबीवीपी की विश्वविद्यालय इकाई की ओर से डीएसडब्ल्यू कार्यालय पर 16 दिनों से पूर्णकालिक अनशन जारी है। मंगलवार को एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को 3000 पोस्टकार्ड पर शुल्क वृद्धि के विरुद्ध छात्र-छात्राओं के संदेश लिखवाकर भेजे।  एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीरज कुंदन बुधवार को इलाहाबाद विश्वविद्यालय पहुंचेंगे और संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले जारी छात्रों के आमरण अनशन में शामिल होकर आंदोलन को अपना समर्थन देंगे। वह दोपहर एक बजे अनशन स्थल पर आएंगे।

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