Wed. Jun 24th, 2026

 

महिलाओं ने पूरे उत्साह पूर्वक उठाया आनन्द

बेतिया : पश्चिम चम्पारण जिला मुख्यालय बेतिया स्थित सुप्रिया रोड के एक निजी होटल में चिक एंड चार्म एक्जीविशन का आयोजन किया गया। मधुबनी पेंटिंग, बनारसी लेडीज गारमेंट्स,आर्टिफिशियल ज्वेलरी, एसेसरीज आदि की इस अत्याधुनिक एक्जीविशन का उद्घाटन नगर निगम की महापौर गरिमादेवी सिकारिया ने किया। होटल की प्रोपराइटर साक्षी झुनझुनवाला के सौजन्य और संयोजन में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की इस प्रदर्शनी का सैकड़ों की संख्या में महिलाओं ने आनंद उठाया। प्रदर्शनी मेले का उद्घाटन करने के बाद महापौर श्रीमती सिकारिया ने कहा कि आज के दौर में आधुनिकता को अपनाने की होड़ है। विशेषकर महिलाओं और लड़कियों में सजने और सुंदर दिखने की बड़ी प्रति स्पर्धा काफी बढ़ गई है। ऐसे में कोलकाता की आर्टिफिशियल ज्वेलरी, बनारसी साड़ी, लहंगा, दुपट्टा और लिनन सूट्स के साथ साज सज्जा के लिए उपयोगी मधुबनी पेंटिंग का एक छत के नीचे उपलब्ध होना अपने बेतिया में शायद पहली बार संभव हुआ है। इस प्रदर्शनी की संयोजिका साक्षी झुनझुनवाला ने कहा कि नगर निगम की माननीया महापौर गरिमा देवी सिकारिया के द्वारा उद्घाटित इस मेला में आकर प्रदर्शनी देखने और खरीदारी का मौका कल 27 जुलाई 23 शाम तक लोग उठा सकेंगे। इस अवसर पर संजय झुनझुनवाला, निकेत कुमार, पूनम झुनझुनवाला, आकांक्षा राजगढ़िया, स्वाति चौधरी, मधु झुनझुनवाला, मोना जैन ने एग्जिविशन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

Spread the love

By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

Leave a Reply

You missed

खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया