Tue. Jun 23rd, 2026

 

दो घरों में आग, हजारो की संपति जलकर राख

बेतिया : पश्चिम चम्पारण जिला के बेतिया पुलिस अंतर्गत नौतन के गहिरी गम्हरिया में दो पक्ष के भूमि विवाद में हिंसक संघर्ष हुआ। जिसमे हुई गोलीबारी में लगभग आधा दर्जन के घायल होने की खबर है। घायलों की चिकित्सा बेतिया जीएमसीएच में चल रहा है। घटना की सूचना पर सदर एसडीपीओ महताब आलम के नेतृत्व में भारी संख्या में पुलिस बल पहुंचकर मामला शांत कराया। नौतन के गहिरी के वार्ड नंबर 01 व 02 गम्हरिया में कारी शर्मा व किशोरी साह के बीच करीब 50 वर्षों से करीब 18 बीघा भूमि पर विवाद चल रहा है, जो न्यायालय मे भी लंबित है, लेकिन इसी बीच किशोरी साह के समर्थक सोमवार को दखल कब्जा करने के नियत से हरवा हथियार से लैस होकर जमीन पर चढ़कर जोत आबाद करने लगे। दखल कब्जा करने की सूचना प्रथम पक्ष के कारी शर्मा के लोग पहुंच दखल कब्जा का विरोध करने लगे। जिसमें किशोरी साह के समर्थको की ओर से गोलीबारी होने लगी। गोलीबारी मे अक्षय कुमार (18), विद्यार्थी शर्मा(55), प्रदीप राम(30), नंद किशोर प्रसाद(32), रघुनाथ शर्मा(56), नितेश कुमार(22), किस्मती देवी(49) सभी गहिरी गम्हरिया के करीब आधा दर्जन लोग जख्मी हो गए।जख्मी लोगों को स्थानीय लोगों द्वारा बेतिया जीएमसीएच अस्पताल पहुंचाया गया है।जहां उनकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।इधर कारी शर्मा के समर्थक मोहर महतो के झोपड़ी नुमा घर मे आग भी लगा दी।जिससे घर समेत घर मे रखे हजारो की समान जलकर राख हो गये।इधर घटना की सूचना मिलते ही सदर एसडीपीओ महताब आलम, योगापट्टी सर्किल इंस्पेक्टर उग्रनाथ झा,मझौलिया थानाध्यक्ष अभय कुमार, नौतन थानाध्यक्ष खालीद अख्तर, जगदीशपुर थानाध्यक्ष राजू कुमार मिश्र के साथ जिला से आए सैकड़ों पुलिस के महिला व पुलिस बल घटनास्थल पर पहुंच दोनों पक्षों से बात कर मामला को शांत कराया। सदर एसडीपीओ महताब आलम ने बताया कि गांव में तनाव को देखते हुए गम्हरिया में भारी संख्या मे पुलिस बल की तैनाती की गई है। घटना में संलिप्त तथा गोलीबारी करने वाले लोगों की जानकारी प्राप्त की जा रही है। उपर्युक्त लोगों को चिन्हित कर कार्रवाई की जाएगी। नौतन सीओ रमेश कुमार ने बताया कारी शर्मा व किशोरी साह के बीच करीब 50 वर्षों से जमीनी विवाद चल रहा है। किशोरी साह के पक्ष के लोग नीलामी में जमीन मिलने के बाद बता रहे हैं जबकि कारी शर्मा खतियानी होने की बात कह रहे हैं। जिसको लेकर करीब 18 बीघा भूमि पर विवाद है।दोनों पक्षों को कई बार जनता दरबार में नोटिस तामिल करा कर बुलाया गया व शांति व्यवस्था बनाए रखने की बात कही गई। इधर एकाएक दोनों पक्ष अपना-अपना दावा करते हुए जमीन पर दखल कब्जा करने को चढ़ गये, जहां विवाद उत्पन्न हो गई। पुलिस सूत्रों की माने तो गोलीबारी होने की सूचना मिली है। जिसमे चार लोगो की घायल होने की खबर भी है।

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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया