Wed. Jun 24th, 2026

मैनाटांड़: पश्चिम चम्पारण जिला के नरकटियागंज अनुमंडल अंतर्गत मैनाटांड़ में मस्तीचक सारण से निकला 251 कुण्डीय विराट गायत्री महायज्ञ मस्तीचक, शक्ति कलश रथ यात्रा का स्वागत व पूजन किया गया।उल्लेखनीय है कि 31 अक्टूबर से 3 नवंबर 2023 सारण स्थित मस्तीचक के श्रीरमेशपुरम में होने वाला 251 कुण्डीय विराट गायत्री महायज्ञ के लिए गायत्री तीर्थ रथयात्रा सारण से निकलकर बिहार के सभी जिला में घूमते हुए शक्ति कलश यात्रा रथ मैनाटांड प्रखंड के विभिन्न गांव में पहुंचा। इस दौरान श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर 251 कुण्डीय विराट गायत्री महायज्ञ मस्तीचक के शक्ति कलश का परिजनों एवं श्रद्धालुओ ने भव्य स्वागत एवं पूजन किया। इस यात्रा में दिशा संस्था के टोला नायक अनंतराज भारद्वाज ने बताया कि इस शक्ति कलस का उद्देश्य, मानव में देवत्व का उदय करना है। यह आयोजन मस्तीचक में 31 अक्टूबर से 3 नवंबर 2023 तक आयोजित किया जाएगा। इस दौरान जगह-जगह महिलाएं और पुरुष श्रद्धालुओं ने रथ पर विराजमान मां गायत्री प्रतिमा व कलश की पूजा अर्चना कर देश दुनिया में शांति और आपसी भाईचारे के लिए प्रार्थना किया। इस क्रम में ओमप्रकाश मिश्र, बालेश्वर सिंह, रितिक कुमार शर्मा, डॉ धनंजय कुमार त्रिपाठी, जोखू साह व अन्य विशिष्ट उपस्थित रहे।

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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया