बेतिया : विभिन्न मांगों को लेकर मंगलवार को बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ जिला शाखा पश्चिमी चंपारण प्रदर्शन करेगा । उपर्युक्त जानकारी संतोष प्रसाद बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ जिला शाखा पश्चिम चंपारण ने देते हुए बताया कि भारतीय राज्य कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय कार्यकारिणी बिहार राज्य राज्य कर्मचारी महासंघ बिहार पटना के राज्य कर्मियों की बैठक में लिए गए निर्णय अनुसार पुरानी पेंशन बहाल करने ठेका संविदा समाप्त करने, संविदा पर बहाल कर्मी को नियमित करने ,वेतन पुनरीक्षण समिति का गठन करने 18 माह से बकाया महंगाई भत्ता का भुगतान करने मांगों को पूर्ति के लिए मंगलवार को जिला स्तर पर जिला पदाधिकारी के समक्ष राष्ट्रीय परिवाद मार्च आयोजित करते हुए मांग पत्र मुख्यमंत्री को समर्पित करने का निर्णय लिया गया है जिसके आलोक में श्री प्रसाद ने जिला पदाधिकारी को आवेदन देते हुए बताया कि मंगलवार को प्रदर्शन का आयोजन किया जाएगा।
By Awadhesh Sharma
न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन
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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया
Jun 22, 2026
Awadhesh Sharma
