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जवान के बेटे के मौत ने बुढ़ापे का सहारा छीना, घर मे मचा कोहराम, परिजनों के आंख के आंसू नहीं सुख रहें हैं

बेतिया : पश्चिम चम्पारण जिला के बेतिया पुलिस अंतर्गत पुरुषोत्तमपुर थाना क्षेत्र के भेड़िहारी निवासी नुरुल होदा के सत्रह वर्षीय पुत्र मजरे आलम की तेज धारदार हथियार से हत्या करके अपराधियों ने सिर को धड़ से अलग कर दिया है। इस मामले को ले क्षेत्र में सनसनी फैल गयी है। नृशंस हत्याकांड को लेकर लोग भी सकते में हैं।उधर मृतक नजरे आलम के घरवालों का रोकर बुरा हाल है। आंख से आंसू सूख नहीं रही है। पिता नुरूल होदा और माता रौशन आरा छाती पीट पीट कर रोते रहे। यह कहते बार बार बेहोश हो जाती रही कि ‘ये अल्लाह इ का कर देहल, हमनी के रहते जवान बेटा के हमनी से छीन ले ल, जे हमनी के बेटा के मरले बा ओकरा के नरक दिअ हे अल्लाह’। उधर भाई मसरे आलम, सरफे आलम, बहन राजदा खातून, साजदा खातून, नाजदा खातून का भी बुरा हाल है। बस मृतक मजरे आलम के परिजन रोये जा रहें । परिजनों के आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहा। मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने मृतक मजरे आलम के घरवालों को किसी तरह ढांढ़स बंधाया। मुखिया प्रतिनिधि शेख नेसार, सरपंच फैयाज उर्फ चांद, समाजसेवी इजहार, नेसार सहित अन्य ग्रामीणों ने इस नृशंस हत्याकांड की कड़ी निंदा की है। पुलिस से घटना का उद्भेदन करते हुए, हत्यारों की अविलंब गिरफ्तारी की मांग की है।

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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया