Wed. Jun 24th, 2026

बेतिया: पश्चिम चम्पारण जिला अंतर्गत जिला प्रेक्षागृह में उपस्थित सभी जनप्रतिनिधियों को जिला पदाधिकारी पश्चिम चम्पारण दिनेश कुमार राय, उप विकास आयुक्त अनील कुमार, नोडल पदाधिकारी-सह-प्रभा री पदाधिकारी जिला विकास शाखा बेतिया सुजीत कुमार वर्णवाल ने नमामि गंगे योजना अंतर्गत नदियों तथा तलाबों के जल को स्वच्छ रखने के सम्बंध मे सभा में उपस्थित सभी जनप्रतिनिधियों को सम्बोधित करते हुए बताया कि अपने पंचायतो से होकर गुजरने वाली नदियों, पंचायतो में तलाब हो तो उनके जल को संरक्षित व स्वच्छ बनाए रखने के लिए विभिन्न बिंदुओं का उल्लेख करते हुए विचार व्यक्त किया। पदाधिकारीद्वय ने बताया कि नमामि गंगे योजना का उद्देश्य पुराने घाटों का जीर्णोद्धार, नये घाट, चेंजिंग रुम, शौचालय, बैठने की जगह, ऑक्सीडेशन प्लान्ट बायोरेमेडेशन प्रक्रिया अंतर्गत, सीवेज ट्रीटमेंट प्लान्ट का निर्माण, नदियों किनारे बसे शहरों में एसटीपी का निर्माण, नदियों व उसकी सहायक नदियों के किनारे पौधारोपण, रिवर फ्रंट डेवलपमेंट का निर्माण (आधुनिकीकरण और नवीनीकरण) नदियों तथा तलाबों के किनारे वृक्षारोपण, स्नान घाट व श्मशान घाटों का निर्माण, विभिन्न संगठनों व संस्थाओं की सहायता से जनजागृति, नदियों तथा तलाबों में गंदे नालों के जल की टैपिंग सुनिश्चित करना है।

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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया