Wed. Jun 24th, 2026

बेतिया। महात्मा गाँधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) अंतर्गत कार्यों के सफल क्रियान्वयन को मनरेगा कर्मचारियों, पंचायत प्रतिनिधियों एवं जीविका दीदियों का प्रशिक्षण सह-उन्मुखीकरण कार्यक्रम का सफल आयोजन बेतिया ऑडिटोरियम में किया गया। उपर्युक्त कार्यक्रम अंतर्गत कुल-303 ग्राम पंचायत के मुखिया को मनरेगा मेट एवं एनएमएमएस का प्रशिक्षण एवं लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान फेज-2 अंतर्गत ठोस एवं तरल अपशिष्ट का प्रशिक्षण दिया गया। जिला पदाधिकारी दिनेश कुमार राय ने कार्यक्रम का उद्घाटन विधिवत दीप प्रज्जवलित कर किया। इस अवसर पर उप विकास आयुक्त अनील कुमार, नगर निगम बेतिया आयुक्त शंभु कुमार, निदेशक डीआरडीए सुजीत वर्णवाल, जिला पंचायत राज पदाधिकारी मनीष कुमार व अन्य सम्बंधित पदाधिकारी उपस्थित रहे।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डीएम ने कहा कि सरकार के उदेश्यों को पूरा करना है। उसमें पंचायत के जनप्रतिनिधियों का अपेक्षित सहयोग आवश्यक है। जिला के विकास में पंचायत की भूमिका महत्वपूर्ण है। सभी सामंजस्य स्थापित कर कार्य सम्पादित करें और पंचायत का विकास सुनिश्चित करें। पंचायत का विकास होगा तो जिला और राज्य का भी विकास होगा। न्याय के साथ विकास की गति को आगे बढ़ाने में सभी पंचायत प्रतिनिधि सहयोग करें। उन्होंने कहा कि आज का यह प्रशिक्षण-सह -उन्मुखीकरण कार्यक्रम जनप्रतिनिधियों व पदाधिकारियों एवं कर्मियों के लिए अति आवश्यक है। उप विकास आयुक्त अनील कुमार ने कहा कि मनरेगा भारत सरकार की एक सामाजिक सुरक्षा योजना है, जो देश में ग्रामीण श्रमिकों को रोजगार और आजीविका प्रदान करने का प्रयास करती है। मनरेगा का उदेश्य वितीय वर्ष में प्रत्येक ग्रामीण परिवार को कम से कम 100 दिनों की गारंटीकृत मजदूरी रोजगार प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि मनरेगा मांग आधारित मजदूरी ने ग्रामीण क्षेत्रों के गरीबों की आय के पूरक के रुप में मदद की है, कई किसानों ने मनरेगा मजदूरी से हुई को अपनी भूमि पर खेती की गतिविधियों के लिए उपयोग किया है। मनरेगा अंतर्गत प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन संबंधित विकास कार्यों ने मिट्टी की गुणवता और जलस्तर में सुधार करने में मदद की है। उन्होंने बताया कि पश्चिम चम्पारण जिलान्तर्गत मानव दिवस सृजन वितीय वर्ष 2022-23 में कुल-65 लाख 27 हजार 93 मानव दिवस का सृजन किया गया है। वितीय वर्ष 2023-24 में अबतक कुल-05 लाख 39 हजार मानव दिवस का सृजन किया जा चुका है। जल-जीवन-हरियाली अभियान अंतर्गत पश्चिम चम्पारण में कुल-418 तालाबों, 31 आहरों एवं 593 पईनों का कार्य पूर्ण किया जा चुका है। नए जल स्रोत अवयव अंतर्गत कुल-514 निजी तालाबों का भी निर्माण कराया गया है। इस अभियान के तहत मनरेगा से वितीय वर्ष 2022-23 में कुल-05 लाख 99 हजार वृक्षारोपण किया गया है। वितीय वर्ष 2023-24 में कुल-06 लाख 06 हजार वृक्षारोपण करने हेतु लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने बताया कि पश्चिम चम्पारण जिला में विभाग द्वारा अमृत सरोवर अंतर्गत 75 तालाबों के लक्ष्य के विरूद्ध में जिलास्तर पर 78 अमृत सरोवर का कार्य प्रारंभ करते हुए कुल-38 योजनाओं का कार्य पूर्ण करा लिया गया है। जिला अंतर्गत मनरेगा एवं लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने को लेकर 16 मुखियाओं यथा- संतोष कुमार, तारा देवी, अनंता देवी, अजीत कुमार दूबे, हंकारी देवी, नवीन प्रसाद, कन्हैया प्रसाद, सुनील कुमार सिंह, श्री रामदेव भगत, सबीता देवी, अंतिमा देवी को जिला पदाधिकारी ने प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। मेरा गांव-मेरा उद्यान अंतर्गत अच्छा प्रदर्शन करने वाले मुखिया आशीष भट्ट, सुषमा देवी तथा अमृत सरोवर अंतर्गत उत्कृष्ट कार्य करने वाले मुखिया आशा देवी, हरेन्द्र प्रसाद, विनोद कुमार पाण्डेय को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।

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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया