Tue. Jun 23rd, 2026
बेतिया। पश्चिम चम्पारण जिला पदाधिकारी दिनेश कुमार राय ने चनपटिया स्टार्टअप जोन का अवलोकन किया। उप विकास आयुक्त अनील कुमार ने चनपटिया स्टार्टअप जोन की विकास प्रक्रिया की जानकारी विस्तारपूर्वक डीएम को दिया। इस दौरान उन्होंने स्टार्टअप जोन में संचालित विभिन्न उद्यमों का अवलोकन किया और उनके ऑनर से रॉ-मेटेरियल, प्रोडक्शन, मार्केटिंग, ब्रांडिंग की जानकारी प्राप्त किया। कई उद्यमियों ने बताया कि वे उद्यम बढ़ाना चाहते हैं। डिमांड के अनुरूप वे प्रोडक्शन नहीं कर पा रहे हैं। डिमांड पूरी करने के लिए अतिरिक्त मशीन लगाने की आवश्यकता है। इसके लिए जिला प्रशासन से सहयोग की आवश्यकता है। डीएम ने उद्यमियों का उत्साहवर्धन किया और कहा गया कि स्टार्टअप जोन की स्थापना में जिला प्रशासन का बहुमूल्य योगदान है।
उन्होंने कहा कि प्रोडक्शन बढ़ाने, अतिरिक्त नयी मशीन स्टॉल करने सहित अन्य बिन्दुओं पर सरकार एवं जिला प्रशासन अत्यंत ही गंभीर है। सभी संभव सहायता की जायेगी। इस अवसर पर उप विकास आयुक्त अनील कुमार, अपर समाहर्ता राजीव कुमार सिंह, एसडीएम बेतिया विनोद कुमार, महाप्रबंधक जिला उद्योग केन्द्र अनील कुमार व अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया