Tue. Jun 23rd, 2026
निर्माणाधीन टेक्सटाईल एंड लेदर कलस्टर का नवागत जिला पदाधिकारी ने किया अवलोकन 
बेतिया। पश्चिम चम्पारण जिला के नवागत जिला पदाधिकारी, दिनेश कुमार राय ने औधोगिक क्षेत्र, कुमारबाग में 02 लाख वर्गफीट में निर्माणाधीन टेक्सटाईल एवं लेदर कलस्टर के निरीक्षण किया। निरीक्षण के क्रम में उन्होंने पदाधिकारी, अभियंता एवं संवेदकों से निर्माण कार्यों की अद्यतन जानकारी प्राप्त किया। बियाडा के अभियंता ने बताया कि कुल-08 प्रिफैब शेड का निर्माण किया जा रहा है। जिसमें से 04 प्रिफैब शेड का निर्माण कार्य लगभग 83 प्रतिशत कर लिया गया है, शेष शीघ्र पूर्ण किया जायेगा। डीएम ने निर्देश दिया कि त्वरित गति से निर्माण करते हुए 04 प्रिफैब शेड का निर्माण अप्रैल माह के अंत तक पूर्ण कराना सुनिश्चित करें, जिससे वहाँ अविलंब उत्पादन प्रारम्भ हो सके। दिनेश कुमार राय ने निर्देश दिया कि दिव्यांगजनों, वृद्धजनों एवं उनके साथ आने वाले बच्चों के लिए रैम्प का भी निर्माण कराना सुनिश्चित करें। ज्ञात हो कि पश्चिम चम्पारण जिका को प्लग एंड प्ले मॉडल अंतर्गत के उत्पादन केंद्र बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। चनपटिया स्टार्टअप जोन के पास औद्यौगिक क्षेत्र, कुमारबाग में टेक्सटाईल एंड लेदर कलस्टर का निर्माण कराया जा रहा है। टेक्सटाईल एवं लेदर क्लस्टर में 02 लाख वर्गफीट में 08 प्रिफैब स्ट्रक्चर सहित शेड, कैंटीन, ड्रेनेज सिस्टम, शौचालय, सड़क का निर्माण किया जा रहा है। उसके प्रारम्भ होने से लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध होगा और नई पीढ़ी  को रोजगारोन्मुख उज्ज्वल भविष्य मिल सकेगा। इस क्रम में डीएम विनय कुमार राय के साथ  उप विकास आयुक्त अनील कुमार, अपर समाहर्त्ता राजीव कुमार सिंह, एसडीएम बेतिया विनोद कुमार, महाप्रबंधक जिला उद्योग केन्द्र अनील कुमार सिंह व बियाडा के अभियंता शामिल रहे।
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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया