Tue. Jun 23rd, 2026

सारण: जन सुराज पदयात्रा के दौरान सारण में एक आमसभा को संबोधित करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि आज बिहार में नेता जब जनता के बीच जाते हैं तो कुछ करे न करे दो सबसे ज्यादा जरूरी काम जरूर करते हैं। पहला, वो अपने विरोधियों को गाली देते हैं। दूसरा, जनता को लालच देते हैं कि उनके लिए कौन सा काम वो करने वाले हैं।

पीके ने कहा कि जनता को बता रहे हैं कि जब तक जनता जागरुक नहीं होंगे तब तक वह कुछ भी काम नहीं कर सकेंगे। आज आपके बीच नाली-गली, राशन कार्ड बांटने नहीं आया, न ही आपके बीच दूसरे पार्टी के नेताओं की तरह खरी-खोटी सुनाने आया। आज आपसे जानने आया कि मान लीजिए दूसरे पार्टी के नेता चाहे वो कॉंग्रेस के हो या लालू-नीतीश या फिर भाजपा जो दावा करती है कि बिहार के लिए उन्होंने बहुत कुछ किया है। मान भी लेते हैं कि देश के आजाद होने के बाद उन्होंने बिहार के विकास के लिए बहुत कुछ किया है। मगर मेरे हीं नहीं सबके मन में सवाल उठता रहा होगा कि इतना काम करने के बाद भी बिहार देश का सबसे पिछड़ा, गरीब और अशिक्षित भुखमरी वाला राज्य अबतक कैसे बना हुआ है ? आज अगर बिहार देश होता तो विश्व का छठवां सबसे गरीब देश होता। आज बिहार देश का सबसे ज्यादा बेरोजगार वाला राज्य है, जो बात आप सभी बिहार की जनता को मालूम है और आपसे कुछ छिपी हुई नहीं है।

Spread the love

By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

Leave a Reply

You missed

खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया