Tue. Jun 23rd, 2026

गली के सीमेंटीकरण में यह भ्रष्टाचार दुर्ग जिले के रिसाली नगर निगम में किया गया है। यहां के रहवासी खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। एक तरफ सरकार अधिक से अधिक सुविधाएं देने के लिए प्रयास कर रहा था तब दूसरी ओर भ्रष्टचार ठेकेदार और इंजीनियर मनमानी कर रहा हैं। नगर निगम के वार्ड क्रमांक 35 गलियों में किया गया था सीमेंटीकरण काम देख लीजिए। यहां के लोगों ने सीमेंटीकरण में किए गए भ्रष्टचार और मीलवाटी की शिकायत गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू को की। उन्होंने इस प्रकरण में आवश्यक कार्यवाही से आश्वासन दिया था। 60 मीटर तक हो चुका था सड़क का निर्माण
एनएसपीसीएल पुरैना में तीन अलग-अलग स्थान पर गली सीमेंटीकरण करने 6 या 8 लाख स्वीकृत किया गया है । जिसमें से पप्पू मिश्रा ने निवास स्थान से रामचरण निर्मलकर घर तक कुल 60 मीटर गली सीमेंटीकरण का कार्य पूर्ण कर लिया गया था।

फिर मंत्री से की गई थी शिकायत नागरिकों ने शुरू से घटिया निर्माण की शिकायत क्षेत्रीय विधायक व प्रदेश के गृहमंत्री से किया थी। शिकायत करने पर विवाद की स्थिति निर्मित हो रही है। इसी के बाद आयुक्त ने निर्देश दिए। लोगों का कहना है कि नगर निगम प्रशासन को तत्काल ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए जिससे आवागमन में किसी प्रकार की परेशानी न होने पाए।

Spread the love

Leave a Reply

You missed

खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया