Tue. Jun 23rd, 2026

भिलाई. स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट आने के बाद पुरानी भिलाई पुलिस ने भिलाई-3 सिरसा गेट के समीप मौजूद सिद्विविनायक अस्पताल के चिकित्सक समेत 7 के खिलाफ धारा 304 ए के तहत अपराध दर्ज कर लिया है। पुरानी भिलाई पुलिस के मुताबिक 1 नवंबर 2022 को शिकायकर्ता महेश कुमार वर्मा निवासी देवबलौदा ने थाना में आकर अपने नाती शिवांस वर्मा को सर्दी – खांसी से बीमार होने पर उपचार के लिए सिद्विविनायक अस्पताल में 27 अक्टूबर 2022 को भर्ती कराए थे। जिसका 31 अक्टूबर को उपचार के दौरान मृत्यु हो गई। निरीक्षण पंचनामा कर शव का पोस्ट मार्टम शासकीय अस्पताल, सुपेला से कराया गया था।

नगर पुलिस अधीक्षक, छावनी भिलाई दुर्ग के निर्देश पर बुधवार को चीफ मेडिकल हेल्थ ऑफिसर के संयुक्त जांच दल की रिपोर्ट आने के बाद मामले में अपराध दर्ज कर लिया गया है। जांच में अस्पताल प्रबंधक के चिकित्सक अधिकारी डॉक्टर संमीत राज प्रसाद, आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी शिशुरोग विशेषज्ञ डॉक्टर दुर्गा सोनी, डॉक्टर हरिराम यदु, डॉक्टर गिरीश साहू, पैरामेडिकल स्टाफ विभा साहू, आरती साहू, निर्मला यादव ने बच्चा शिवांस वर्मा के स्वास्थ्य उपचार में लापरवाही बरतने से मृत्यु होना पाया गया है जो धारा 304 ए भादवि का घटित होना पाए जाने से अपराध पंजीबद्ध किया जाता है।

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया