Tue. Jun 23rd, 2026

बेतिया: पश्चिम चम्पारण जिला अंतर्गत बेतिया पुलिस के अधीक्षक उपेंद्रनाथ वर्मा ने बुधवार को कुमारबाग़ ओपी का वार्षिक निरीक्षण किया। इससे पूर्व एसपी को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। निरीक्षण के दौरान एसपी ने थाना के विभिन्न पहलू निरीक्षण करते हुए पुलिस के समक्ष उत्पन्न समस्याओं से अवगत हुए। एसपी ने ओपी के मालखाना व ओपी थाना परिसर का निरीक्षण व सफाई का अवलोकन किया। ओपी प्रभारी अनुज कुमार पाण्डेय से ओपी के विभिन्न मामलों के बारे में जानकारी ली। इस दौरान ओपी थाना में दर्ज विभिन्न कांडों के अनुसंधानकर्ताओं से कांडों की समीक्षा करते हुए, आवश्यक दिशा निर्देश दिया। एसपी ने डायरी को अद्यतन करने तथा अपराध नियंत्रण के लिए पुलिस गश्त तेज करने का निर्देश भी दिया। उन्होंने अपराध के ग्राफ को भी देखा। न्यायालय से जुड़े मामलों के त्वरित निष्पादन करने, हत्या और अन्य मामलों में शीघ्र गिरफ्तारी का निर्देश दिया। इस क्रम में सर्किल इंस्पेक्टर कृष्ण कुमार गुप्ता, ओपी प्रभारी अनुज कुमार पाण्डेय व अन्य पुलिस पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया