Tue. Jun 23rd, 2026

रायपुर की श्रद्धा शुक्ला ने मसूरी के लाल बहादुर शास्त्री प्रशासन अकादमी में छत्तीसगढ़िया दम दिखाया । श्रद्धा शुक्ला ने एकेडमी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान छत्तीसगढ़ का राज्य गीत गाया । प्रदेश के राज्य गीत अरपा पैरी के धार को बेहद सुरीले अंदाज में श्रद्धा शुक्ला ने परफॉर्म किया । श्रद्धा शुक्ला ने हाल ही में यूपीएससी में 45वीं रैंक हासिल करते हुए देश के टॉप 50 में जगह बनाई थी। श्रद्धा शुक्ला जल्द ही बतौर आईएएस अपनी सेवा देंगी, फिलहाल उनकी ट्रेनिंग जारी है । दरअसल लाल बहादुर शास्त्री प्रशासन अकादमी में सभी राज्यों से सलेक्टेड कैंडिडेट ने अपने-अपने प्रदेश की कला और संस्कृति का प्रदर्शन किया । इस दौरान श्रद्धा शुक्ला छत्तीसगढ़िया लुगरा (साड़ी) में नजर आईं

श्रद्धा ने सिक्कों की माला और प्रदेश के पारंपरिक गहनों को पहनकर उन्होंने छत्तीसगढ़िया संस्कृति की झलक दिखाई। अपने आउफिट के बारे में देशभर से सेलेक्ट होकर आए युवाओं को बताया । प्रशासनिक अकादमी में कुछ महीनों की ट्रेनिंग के बाद श्रद्धा शुक्ला समेत सभी अफसर अपनी पोस्टिंग हासिल करेंगे, बहुत मुमकिन है कि आईएएस की ट्रेनिंग पूरी करने के बाद श्रद्धा को छत्तीसगढ़ में ही पोस्टिंग मिले। मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में इंडिया डे सेलिब्रेट किया गया। यहां जिसमें देश भर से आईएएस, आईपीएस का प्रशिक्षण ले रहे प्रशिक्षु अधिकारियों ने भाग लिया।

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया