Tue. Jun 23rd, 2026

दुर्ग पुलिस इस समय प्लास्टिक उपयोग मुक्त भिलाई बनाने का अभियान चला रहा है। इसके लिए 10 थानों से 3-3 पुलिस कर्मियों को लेकर 30 जवानों का एक टास्क फोर्स तैयार की गई है। ये पुलिसकर्मी लोगों को सिंगल यूज प्लास्टिक उपयोगऔर गंदा के प्रति अवेयर करेंगे। भास्कर की टीम ने जब इसकी पड़ताल की तो पता चला कि जब शहर को स्वच्छ बनाने का बीड़ा उठाने वाली दुर्ग पुलिस अपने थाना परिसर को स्वच्छ नहीं रख पा रही है तो लोगों को जागरूक कर शहर कैसे साफ करवाएगी।

बुधवार को एसपी अभिषेक पल्लव के नेतृत्व में दुर्ग पुलिस, बीएसपी, निगम, जिला प्रशासन व स्कूल कॉलेज सहित एनएसएस व एनसीसी के बच्चों ने मिलकर बुधवार सुबह सिविक सेंटर में सफाई अभियान चलाया। सुबह 8 से लेकर 11 बजे तक उन्होंने पूरे परिसर में झाड़ू लाकर उसे साफ किया। वहां पड़ी प्लास्टिक और गंदगी को उठाकर दूसरी ले गए। एसपी डॉ. अभिषेक पल्लव का कहना है कि उन्होंने भिलाई शहर को सफाई करने के लिए टास्क फोर्स का गठन किया है। टास्क फोर्स के सभी पुलिस वाले हर आम आदमी को जागरूक करेंगे कि वो अपने घर से 100 मीटर के दायरे में प्लास्टिक उपयोग न रहने दें। ऐसा करने से पूरा शहर साफ हो जाएगा। लोग इसके प्रति जागरूक होंगे तो शहर अपने आप साफ सुथरा हो जाएगा।एसपी दुर्ग ने कहा कि पुलिस इस दौरान लोगों पर निगरानी भी रखेगी। जो भी लोग सिंगल यूज प्लास्टिक उपयोग करते पकड़े जाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगा । पकड़े गए व्यक्ति से अगले दिन 12 घंटे तक सफाई का कार्य करवाया जाएगा।

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया