Tue. Jun 23rd, 2026

 नगर पंचायत बिस्कोहर के राजकीय डिग्री कालेज के सामने आयोजित अखिल भारतीय राष्ट्रीय विराट कुश्ती दंगल के अंतिम दिन सोमवार को चंडीगढ़ के प्रदीप और हरियाणा के विनोद के बीच रोमांचक कुश्ती हुई। अंतिम कुश्ती में 18 हजार रुपय इनाम था। दोनों पहलवानों ने एक-दूसरे पर दांव आजमाए, लेकिन निर्धारित समय 20 मिनट में हार-जीत का फैसला नहीं हो सका। इनाम की राशि दोनों पहलवानों में बांट दी गई। दूसरा दिन के कुश्ती दंगल में मेरठ के छोटा डॉन व आगरा के सुरेंद्र के बीच रोमांचक कुश्ती में छोटा डॉन विजयी रहे। अयोध्या के नरेंद्र दास ने आगरा के भीम को चित कर दिया, जबकि राजेश हरियाणा व अनूप दास अयोध्या की कुश्ती बराबरी पर रही

कारिया शरीफ उत्तराखंड के गूंगा पहलवान ने पंजाब के मनोज पहलवान को पटकनी दी। सर्वेश तिवारी व भूरा पहलवान के बीच हुई कड़ा मुकाबला हुआ है सर्वेश तिवारी ने जीत हासिल की। अयोध्या के पहलवान विवेकदास ने आगरा के पहलवान गामा पर जीत हासिल की। आगरा के भीम व कारिया शरीफ के गूंगा के बीच में कांटे की टक्कर हुई, जिसमें गूंगा पहलवान ने कुश्ती जीत ली। दंगल में 20 जोड़े पहलवानों ने दमखम दिखाए। इस मौके पर स्वामी राम दिनेशाचार्य, हनुमानगढ़ी के महंत बालकराम दास, आयोजक अभिषेक दास, अजय गुप्ता, कालिया बाबा, सुधीर त्रिपाठी, संजय सिंह, हनुमत निवास पाठक, विक्की कौशल, विनय जायसवाल सहित नगर व क्षेत्र के भारी तादाद में दर्शक मौजूद रहे।

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया