Tue. Jun 23rd, 2026

शाहजहांपुर। कार्तिक पूर्णिमा पर मंगलवार को मिर्जापुर क्षेत्र के ढाई घाट पर गंगा स्नान के लिए सुबह से आस्था का सैलाब उमड़ने लगा। हजारों श्रद्धालुओं ने हर-हर गंगे के उद्घोष के साथ पतित पावनी गंगा में आस्था की डुबकी लगाई। घाट पर मौजूद पंडों-पुरोहितों को अन्न, वस्त्र, मिठाई, फल, दक्षिणा देकर पुण्य लाभ अर्जित किया। बाद में श्रद्धालुओं ने कार्तिक मेले का आनंद लिया। दुकानों पर जरूरत की चीजों की खरीददारी की।

मंगलवार को कोलाघाट पर रामगंगा का पक्का पुल भारी वाहनों की नो एंट्री, ट्रैक्टर-ट्रॉली से यात्रियों के जाने पर प्रतिबंध, कोलाघाट पर आने जाने के लिये पैंटून पुल न बन पाने के कारणों से चार नवंबर से शुरू हुए कार्तिक मेला में एक दिन पहले तक सन्नाटा बना रहा था। लॉकडाउन के बाद दो वर्ष के अंतराल पर होने वाले कार्तिक मेला में इस बार कार्तिक पूर्णिमा पर श्रद्घालु कम आएंगे। मेले में ज्यादा किराया खर्च कर दूरदराज के जिलों से दुकानें लेकर आये कारोबारी भी मेले में भीड़ नहीं होने से मायूस थे। लेकिन पर्व स्नान के दिन सुबह से इन सारी दुश्वारियों पर आस्था भारी पड़ने लगी। जिले भर से हजारों श्रद्धालु जलालाबाद, अल्हागंज, अमृतपुर (फर्रुखाबाद) होकर लगभग 60 किमी अतिरिक्त यात्रा करके सुबह से ढाईघाट गंगातट पर पहुंचने लगे, जिससे मेले में रौनक आ गई। श्रद्धालुओं ने पर्व स्नान कर खरीदारी शुरू की तो मेले के बाजारों में भीड़ बढ़ गई। बाजार में सौंदर्य प्रसाधन की वस्तुएं खरीदने को महिलाओं की अपार भीड़ रही। वहीं किसानों ने पशुओं से संबंधित सामान और लाठियां खरीदी, जबकि बच्चों और युवाओं ने मेले में लगे बड़े झूले, रेल, मिकी माउस, चाट-पकौड़ी आदि का लुत्फ लिया। इनमें से तमाम श्रद्धालु चंद्र ग्रहण के बाद बुधवार को गंगा स्नान कर मेले से घर वापसी करेंगे।

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया