Tue. Jun 23rd, 2026

तालग्राम विकास खंड में ग्राम सचिवों ने समीक्षा बैठक का बहिष्कार कर दिया गया । इस दौरान बीडीओ पर अमर्यादित भाषा का आरोप लगाया दिया गया है । वहीं, पीड़ित ग्राम पंचायत सचिव बृजेश कुमार की आंखों से आंसू आ गया ।

कन्नौजी जिले के तालग्राम विकास खंड में साप्ताहिक समीक्षा बैठक के दौरान ग्राम पंचायत सचिव ने बीडीओ पर अमर्यादित भाषा का प्रयोग करने का आरोप लगाया है। भाषा शैली से आहत सचिवों ने बैठक का बहिष्कार कर दिया। पीड़ित सचिव की आंखों से आंसू भी निकल आए।सूचना पर पहुंचे ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि ने पंचायत सचिवों और बीडीओ को बंद कमरों में बैठाकर मामले को रफा-दफा करा दिया। मंगलवार को तालग्राम बीडीओ अखिलेश तिवारी सभी ग्राम पंचायत सचिवों की साप्ताहिक समीक्षा बैठक कर रहे थे। सचिव बृजेश कुमार का आरोप है कि बीडीओ ने ग्राम पंचायत सकरवारा में केयर टेकर मामले में अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया। बृजेश कुमार ने बताया कि आत्म सम्मान पर ठेंस पहुंचने की वजह से उसकी आंखों में आंसू आ आए। यह माजरा देखकर पंचायत सचिव बैठक से उठकर बाहर निकल आए। पंचायत सचिवों की ओर से बैठक का बहिष्कार करने की जानकारी ब्लॉक प्रमुख सुमन सिंह को दी। उसके बाद पहुंचे ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि राजीव सिंह उर्फ पुच्ची ठाकुर ने मामले को किसी तरह शांत कराया गया है ।

Spread the love

Leave a Reply

You missed

खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया