Tue. Jun 23rd, 2026

श्रवण क्षेत्र अंबेडकरनगर। प्रबोधिनी एकादशी के मौके पर श्रवणक्षेत्र धाम से सप्तकोसी परिक्रमा करने वाले श्रद्धालु को मुश्किले का सामना करना पड़ेगा। श्रवणक्षेत्र धाम परिसर में ही बदहाल हो चुके मार्ग को बेहतर करने की जरूरत नहीं महसूस की जा रही है। इसके अलावा संगम तट पर भी प्रशासन की तरफ से कोई तैयारी नहीं दिख रही है। चार नवंबर को प्रबोधिनी एकादशी को लेकर श्रद्धालुओं में भले ही उत्साह हो, लेकिन प्रशासन हर बार की तरह इस बार भी मौन साधा है।

प्रसिद्ध श्रवणक्षेत्र धाम से प्रत्येक वर्ष प्रबोधिनी एकादशी के मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु सप्तकोसी परिक्रमा करते हैं। जिले के अलावा आसपास के जनपदों के भी श्रद्धालु मड़हा व बिसुही के संगम तट पर पहुंचते हैं। स्नान के बाद श्रद्धालु पहले माता -पिता भक्ति के प्रतीक श्रवण कुमार की प्रतिमा के समक्ष पूजन-अर्चन करते हैं। इसके बाद अपनी परिक्रमा शुरू करते हैं। श्रवणक्षेत्र से निकलने वाली यह परिक्रमा अन्नावां बाजार, पवित्र धाम शिवबाबा, अकबरपुर पुराने तहसील तिराहा, शहजादपुर पूर्वी नाका से वापस पहितीपुर मार्ग होते हुए पहितीपुर मार्केट से होकर श्रवणक्षेत्र धाम पहुंचकर संपन्न होती है। सप्तकोसी परिक्रमा मार्ग बीच-बीच में कई जगह बदहाल है। बसखारी से अयोध्या मार्ग के फोरलेन निर्माण का कार्य शुरू होने से अन्नावां बाजार से अकबरपुर नगर के निकट भी कई जगह जगह सड़क गड्ढे में तब्दील है। सड़क बदहाल होने के चलते नंगे पांव चलने वाले श्रद्धालुओं को काफी मुश्किल होगी। इसके बावजूद प्रशासन इस तरफ ध्यान नहीं दे रहा है। स्थनीय राघवेंद्र प्रसाद, जगदीश तिवारी व विजय तिवारी आदि ने संगम तट पर सफाई कराने के साथ ही समय रहते प्रकाश व सुरक्षा व्यवस्था को मुकम्मल करने की मांग की है। उधर, एसडीएम पवन जायसवाल का कहना है कि समय रहते जरूरी व्यवस्थाएं बेहतर की जाएंगी।

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया