Mon. Jun 22nd, 2026

पुलिस के मुताबिक, पिता के जाने पर दिव्यांशी ने दरवाजा बंद कर लिया। बृहस्पतिवार सुबह आठ बजे तक उसका कमरा नहीं खुला। इस पर पिता व सौतेली मां ने आवाज दी, लेकिन कमरे के अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद खिड़की से देखा गया तो दिव्यांशी का शव पंखे से लटक रहा था।

गोरखपुर जिले के शाहपुर इलाके के इंद्रप्रस्थपुरम कॉलोनी में दिव्यांशी (15) का शव पंखे से बंधे दुपट्टे के फंदे से लटकता मिला है। पुलिस की मौजूदगी में शव उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। बताया जा रहा है कि पिता ने मोबाइल फोन देखने से मना किया था। इससे नाराज होकर ही उसने आत्मघाती कदम उठाया। जानकारी के मुताबिक, बिहार के सीवान जिले के ममवलिया निवासी राजेश श्रीवास्तव शाहपुर थाना क्षेत्र के इंद्रप्रस्थपुरम कॉलोनी में मकान बनवाकर परिवार के साथ रहते हैं। बेटी दिव्यांशी हाईस्कूल में पढ़ती थी। बुधवार रात नौ बजे वह कमरे में बैठकर मोबाइल फोन देख रही थी। इसी बीच पिता आ गए और डांटते हुए मोबाइल देखने से मना कर दिए। पुलिस के मुताबिक, पिता के जाने पर दिव्यांशी ने दरवाजा बंद कर लिया। बृहस्पतिवार सुबह आठ बजे तक उसका कमरा नहीं खुला। इस पर पिता व सौतेली मां ने आवाज दी, लेकिन कमरे के अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद खिड़की से देखा गया तो दिव्यांशी का शव पंखे से लटक रहा था। बताया जा रहा है कि पांच साल पहले दिव्यांशी की मां का निधन हो गया था। इसके बाद पिता ने दूसरी शादी कर ली। प्रभारी निरीक्षक शाहपुर रणधीर मिश्रा ने बताया कि पिता ने जो जानकारी दी है, उसके मुताबिक, डांट से नाराज होकर उसने खुदकुशी की है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया