स्वस्थ भविष्य के लिए सतत कृषि, कृषि अनुसंधान परिसर, पटना में विश्व पर्यावरण दिवस 2026 का आयोजन

पटना :भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना में 5 जून 2026 को विश्व पर्यावरण दिवस का आयोजन “प्रकृति से प्रेरित। जलवायु के लिए। हमारे भविष्य के लिए।” विषय तथा “स्वस्थ भविष्य के लिए सतत कृषि” उप-विषय के अंतर्गत किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ बच्चों की चित्रकला प्रतियोगिता से हुआ, जिसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना, रचनात्मकता को प्रोत्साहित करना तथा बच्चों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना था। इसके पश्चात कार्यक्रम समन्वयक, प्रभागाध्यक्ष तथा वैज्ञानिकों ने अपने विचार व्यक्त करते हुए पर्यावरण संरक्षण, जलवायु-सहिष्णु कृषि, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा दीर्घकालिक खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु सतत कृषि पद्धतियों को अपनाने के महत्व पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ. अनुप दास ने सभी कर्मचारियों एवं सदस्यों से व्यावहारिक समाधानों को अपनाने को सामूहिक रूप से आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने सतत कृषि विकास को सुदृढ़ बनाने तथा एक स्वस्थ एवं अधिक सुदृढ़ भविष्य के निर्माण के लिए वर्तमान हितधारकों के साथ-साथ बच्चों सहित भावी पीढ़ियों की सक्रिय भागीदारी एवं सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।
डॉ. आशुतोष उपाध्याय, प्रमुख, भूमि एवं जल प्रबंधन विभाग ने अपनी स्वरचित कविता के माध्यम से उपस्थित जनसमूह को प्रेरित किया और कार्यक्रम में एक रचनात्मक एवं चिंतनशील आयाम जोड़ा। डॉ. कमल शर्मा, पशुधन एवं मत्स्य प्रबंधन प्रभाग, डॉ. ए. के. चौधरी, प्रधान वैज्ञानिक तथा डॉ. अभय कुमार, प्रधान वैज्ञानिक ने भी प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन तथा सतत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय कदम उठाने का आग्रह किया। समारोह का प्रमुख आकर्षण वृक्षारोपण अभियान रहा, जिसने पर्यावरणीय स्थिरता एवं जलवायु कार्रवाई के प्रति संस्थान की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाया। साथ ही, छात्रों एवं बच्चों को “खेत बचाओ अभियान” के बारे में भी जागरूक किया गया, जो बढ़ती पर्यावरणीय चुनौतियों के बीच मिट्टी, जल, जैव विविधता एवं उत्पादक कृषि भूमि के संरक्षण हेतु सामूहिक प्रयासों पर बल देने वाला एक राष्ट्रीय अभियान है। कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. अभिषेक कुमार एवं डॉ. रचना दुबे द्वारा किया गया। कार्यक्रम में वैज्ञानिकों, कर्मचारियों, आईएआरआई हब के विद्यार्थियों तथा बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कुल लगभग 200 प्रतिभागियों की सहभागिता रही।
