पान की वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने के लिए तीन दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन
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पटना : बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के अंतर्गत पान अनुसंधान केंद्र, इस्लामपुर द्वारा कृषि अनुसंधान संस्थान (एआरआई), पटना में 8 से 10 अक्टूबर 2026 तक पान की वैज्ञानिक खेती पर तीन दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसका समापन 10 अक्टूबर 2026 को सम्पन्न हो गया। आत्मा, सारण के वित्तीय सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में सारण जिला के 25 किसान शामिल हुए। कार्यक्रम का उद्घाटन बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के निदेशक अनुसंधान डॉ. ए. के. सिंह तथा कृषि अनुसंधान संस्थान, पटना के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. एस. एन. दास ने किया। इस अवसर पर वैज्ञानिकों ने पान की खेती में वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने, उत्पादन एवं गुणवत्ता बढ़ाने तथा किसानों की आय में वृद्धि के लिए आधुनिक कृषि पद्धतियों के महत्व पर प्रकाश डाला। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसानों को पान की वैज्ञानिक खेती, उन्नत उत्पादन तकनीकों, रोग एवं कीट प्रबंधन तथा फसल प्रबंधन की आधुनिक विधियों से अवगत कराना था। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को पान की खेती के विभिन्न पहलुओं पर तकनीकी जानकारी दी गई। पान के खेतों का भ्रमण कराकर, उन्हें व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया, जिससे वे वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर उत्पादन एवं गुणवत्ता में सुधार कर सकें।कार्यक्रम के कोर्स कोऑर्डिनेटर डॉ. एन. आजमी एवं डॉ. प्रभात कुमार ने प्रशिक्षण के संचालन और समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अवसर पर रंजीत कुमार सहित संस्थान के सभी वैज्ञानिकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई तथा किसानों को पान की उन्नत खेती से संबंधित तकनीकी जानकारी प्रदान किया। उल्लेखनीय है कि बिहार के पान को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग मिलने से उसे विशिष्ट पहचान प्राप्त हुई है। यह पहचान पान की क्षेत्रीय विशेषता, गुणवत्ता और बाजार में उसकी पहचान को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। वैज्ञानिक खेती, उच्च गुणवत्ता और जीआई टैग के प्रति जागरूकता के माध्यम से पान उत्पादकों को बेहतर बाजार अवसर उपलब्ध कराने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। कार्यक्रम के समापन पर किसानों को वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर पान की खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों के कौशल विकास, तकनीकी ज्ञान के विस्तार और कृषि आधारित आजीविका को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस सम्बंध में डॉ. ए के सिंह निदेशक शोध, ने कहा कि “पान की वैज्ञानिक खेती किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। किसानों को उन्नत उत्पादन तकनीकों, संतुलित पोषण, रोग एवं कीट प्रबंधन तथा बेहतर फसल प्रबंधन की जानकारी देना आवश्यक है। बिहार के पान को जीआई टैग मिलने से इसकी विशिष्ट पहचान को मजबूती मिली है। आवश्यकता है कि किसान वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर पान की गुणवत्ता एवं उत्पादन में सुधार करें, ताकि उन्हें बेहतर बाजार और उचित मूल्य मिल सके। बिहार कृषि विश्वविद्यालय किसानों तक नवीनतम कृषि तकनीकों को पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।”
