बेतिया छावनी फ्लाई ओवर दुर्घटना में फिर एक मौत, इसका श्रेय लेने कौन आगे आएंगे…?

बेतिया: पश्चिम चम्पारण जिला मुख्यालय बेतिया का छावनी स्थित रेलवे फ्लाई ओवर जब बनकर तैयार हुआ, तो विकास की बड़ी उपलब्धि बताकर जनप्रतिनिधियों ने खूब श्रेय लिया। जनता को बताया कि यह फ्लाई ओवर शहर की यातायात समस्या का समाधान करेगा, अलबत्ता हालात ऐसे हैं कि यह फ्लाई ओवर सुविधा से अधिक लोगों के लिए खतरे का कारण बनता जा रहा है। शुक्रवार को पुनः फ्लाई ओवर पर एक महिला ट्रक की चपेट में आ गई और उसकी घटनास्थल पर मौत हो गई। यह कोई पहली घटना नहीं है। आये दिन दुर्घटना हो रही हैं, लोग घायल हो रहे हैं और कई परिवार अपने प्रियजनों को खो चुके हैं। यक्ष प्रश्न यह है कि आखिर इस फ्लाई ओवर की डिजाइन किसने पास किया..? क्या निर्माण के समय सुरक्षा मानकों का ध्यान रखा गया..? बेतिया वासियों का कहना है कि पुल पर पर्याप्त जगह नहीं है, यातायात व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं है और बड़े वाहनों के आवागमन के क्रम हमेशा दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
फ्लाई ओवर बनकर तैयार हुआ, तत्पश्चात उसका उद्घाटन हुआ, तब नेताओं ने इसका श्रेय लेने में कोई कसर नहीं छोड़ा। अब वही पुल जानलेवा बनकर निरंतर लोगों की जान ले रहा है। अब क्या उन जनप्रतिनिधियों की कोई जिम्मेदारी नहीं बनती, क्या जनता केवल उद्घाटन और भाषण सुनने के लिए है, उसकी सुरक्षा की चिंता कौन करेगा?
बेतिया की जनता जानना चाहती है कि विकास के नाम पर बने फ्लाई ओवर पर हो रही मौत का जिम्मेदार कौन है, जो लोग इस परियोजना का क्रेडिट लेते रहे, क्या वे इन दुर्घटना की जवाबदेही भी स्वीकार करेंगे? या फिर प्रत्येक मौत के बाद केवल शोक संदेश जारी कर अपना झाड़ते रहेंगे।
छावनी स्थित रेलवे फ्लाई ओवर पर बढ़ती दुर्घटना अब एक गंभीर चेतावनी हैं। जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को जनता के प्रश्न का जवाब देना ही होगा, क्योंकि लोगों की जान किसी भी राजनीतिक श्रेय से कहीं अधिक मूल्यवान है ।
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