‘खेत बचाओ अभियान’ पूर्णिया में धान की सीधी बुआई को किसान जागरूकता कार्यक्रम आयोजित 
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पूर्णियाँ /पटना : कृषि विज्ञान केंद्र, जलालगढ़ तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना ने ‘खेत बचाओ अभियान’ अंतर्गत दिनांक 19 जून, 2026 को पूर्णिया जिला के श्रीनगर प्रखंड के बसगढ़ा गांव में धान की सीधी बुआई (डीएसआर) विषय पर किसान जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम में कुल 76 किसान शामिल हुए, जिनमें 61 पुरुष एवं 15 महिला किसान बताई गई। कृषि विज्ञान केंद्र, जलालगढ़ के डॉ. अतिश सागर ने किसानों को धान की सीधी बुआई (डीएसआर) तकनीक एवं इसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने खेत समतलीकरण, अल्पावधि धान किस्मों के चयन तथा शून्य जुताई मशीनों के उपयोग के महत्व पर प्रकाश डाला। साथ ही, उन्होंने बताया कि कस्टम हायरिंग सेंटरों के माध्यम से लेजर लैंड लेवलर एवं जीरो-टिल सीड ड्रिल जैसी कृषि यंत्रों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।
कार्यक्रम के क्रम में विशेषज्ञों ने बसगढ़ा गांव स्थित कस्टम हायरिंग सेंटर का भ्रमण किया तथा मशीनों की सफाई, रखरखाव आदि से संबंधित प्रत्यक्षण किया। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना के डॉ. घौस अली ने डीएसआर प्रणाली में खरपतवार प्रबंधन के महत्व पर चर्चा करते हुए, शाकनाशी के उचित समय एवं सही मात्रा में उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने किसानों को एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने की सलाह देते हुए कहा कि कुल पोषक तत्वों की आवश्यकता का कम-से-कम 25 प्रतिशत भाग गोबर खाद, वर्मी कम्पोस्ट, जैव उर्वरकों तथा अन्य जैविक स्रोतों से पूरा किया जाना चाहिए। इससे रासायनिक उर्वरकों के उपयोग में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकेगी तथा भविष्य में इनकी निर्भरता को और अधिक घटाया जा सकेगा।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना के निदेशक डॉ. अनुप दास ने अपने संदेश में कहा कि धान की सीधी बुआई (डीएसआर) तकनीक को संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन एवं कुशल कृषि यंत्रीकरण के साथ अपनाने से टिकाऊ कृषि को बढ़ावा मिलेगा तथा किसानों की आय और लाभप्रदता में वृद्धि होगी। कार्यक्रम का समापन डीएसआर तकनीक के प्रत्यक्षण के साथ हुआ
