गया जी में किसानों को मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन का प्रशिक्षण सम्पन्न

पटना : ‘खेत बचाओ अभियान’ के अंतर्गत भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा 2 जून, 2026 को बिहार के गया जी जिला के टनकुप्पा प्रखंड अंतर्गत गजाधरपुर एवं बरसौना गांवों में किसान जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों के बीच टिकाऊ कृषि पद्धतियों, संतुलित उर्वरक उपयोग तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा। कार्यक्रम में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. मणिभूषण एवं वैज्ञानिक डॉ. घौस अली तथा कृषि विज्ञान केंद्र, गया के डॉ. अशोक कुमार ने किसानों को संतुलित एवं विवेकपूर्ण उर्वरक उपयोग, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य कार्ड के महत्व, वैज्ञानिक तरीके से मृदा नमूना संग्रहण, हरी खाद के उपयोग तथा रासायनिक उर्वरकों पर अत्यधिक निर्भरता कम करने के उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। किसानों को मृदा स्वास्थ्य आधारित पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने के लिए प्रेरित किया गया, जिससे फसल उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ मृदा की दीर्घकालीन उर्वरता भी बनाए रखी जा सके।
कार्यक्रम में किसान उत्साहपूर्वक शामिल हुए। दोनों गांवों में आयोजित जागरूकता अभियान में लगभग 110 प्रतिभागियों की उपस्थिति रही। प्रतिभागियों ने विशेषज्ञों के साथ सक्रिय संवाद करते हुए मृदा एवं पोषक तत्व प्रबंधन से संबंधित विभिन्न समस्याओं के समाधान प्राप्त किया। इस जागरूकता अभियान की किसानों ने व्यापक स्तर पर प्रशंसा किया। कार्यक्रम ने किसानों में टिकाऊ पोषक तत्व प्रबंधन के प्रति समझ को सुदृढ़ किया तथा लाभकारी एवं पर्यावरण-अनुकूल कृषि के लिए मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के महत्व को और अधिक रेखांकित किया।
यह कार्यक्रम भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर पटना के निदेशक डॉ. अनुप दास के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। अपने संदेश में उन्होंने किसानों से संतुलित उर्वरक उपयोग, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने का आह्वान किया।
