Wed. Jun 24th, 2026

 

मोतिहारी । पूर्वी चम्पारण जिला मुख्यालय मोतिहारी में भारत रत्न बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर भवन में भारतीय चमार महासंघ (बीसीएम) के तत्वाधान में संविधान दिवस पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसका उद्घाटन सेवानिवृत अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सत्यनारायण राम, बीसीएम के राष्ट्रीय संयोजक सह मानवाधिकार कार्यकर्ता विद्यानंद राम ने संयुक्ततः भारत रत्न बाबा साहब डॉ भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा पर पुष्प माल्यार्पण कर किया। उपर्युक्त कार्यक्रम की अध्यक्षता बीसीएम के राष्ट्रीय सह संयोजक पारसनाथ अम्बेडकर ने किया, जबकि संचालन राष्ट्रीय कार्यकारणी सदस्य किरण राम ने किया। राष्ट्रीय संयोजक श्रीराम ने कहा कि भारतीय संविधान के मौलिक अधिकारों एवं राज्य के नीति निदेशक तत्वों को लागू कर दिया जाए तो भारत धरती पर ही स्वर्ग बन जाएगा। उन्होंने भारतीय संविधान को दुनिया का सर्वोतम संविधान बताया। अध्यक्ष श्री अम्बेडकर ने भारतीय संविधान की प्रस्तावना का पाठ कराया।

उपर्युक्त अवसर पर मुख्य रूप से अनुसूचित जाति /जन जाति कर्मचारी संघ नेता शिक्षक अशोक कुमार राम, नगर निगम मोतिहारी के उप महापौर डॉ लालबाबू प्रसाद, अधिवक्ता चंदन कुमार, रामजी बौद्ध, सेवानिवृत शाखा प्रबंधक शंभू राम, उपेन्द्र कुमार भारती उर्फ उगम राम, शशिभूषण कुमार, मंजीत कुमार, चुन्नू कुमार, रणजीत कुमार, अमन कुमार, मिठू कुमार, गुलशन कुमार, चंदन कुमार व अन्य उपस्थित रहे।

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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया