Wed. Jun 24th, 2026
सत्यदेव जनसेवा ट्रस्ट ने प्रधानमंत्री, सीपीएमजी व पीएमजी से हस्तक्षेप की मांग किया
नरकटियागंज : साधारण प्राप्त डाक जो प्रधानमंत्री भारत सरकार एवं सहकारिता मंत्रालय भारत सरकार से सम्बंधित है, का रेल डाक सेवा नरकटियागंज छंटाई कार्यालय में अनावश्यक रुप से रोके जाने की सूचना के संबंध में कहना है कि विगत 1 माह से प्रधानमंत्री कार्यालय से निर्गत न्यू इंडिया समाचार पत्रिका एवं सहकारिता मंत्रालय से निर्गत सहकार जागरण पत्रिका अतिमहत्वपूर्ण पत्रिका है, पत्रिका साधारण डाक के द्वारा जन प्रतिनिधियो यथा (एमपी, एमएलए) एवं प्रशासनिक पदाधिकारियो को प्रेषित की जाती है, इसके अतिरिक्त सभी प्रशासनिक एवं शैक्षणिक पत्र साधारण डाक से वितरण हेतु प्राप्त होता है। ऐसे साधारण पत्र का डाक थैला महिनो से रेल डाक सेवा, नरकटियागंज पश्चिम चम्पारण बिहार के छटाई कार्यालय में पड़ा हुआ है और सरकार का उदेश्य धरासायी हो रहा है। इस सम्बंध में ज्ञात हुआ है कि रेल डाक सेवा “यू” मंडल मुजफ्फरपुर बिहार में पदस्थापित निरीक्षक “यू” प्रथम रेल डाक सेवा “यू” मंडल मुजफ्फरपुर कुन्दन कुमार सिंह के एक ईमेल (Email) जो एसआरओ (SRO) नरकटियागंज को भेज कर आदेश दिया है कि रेल मेल सेवा नरकटियागंज के स्वीकृत जन बल (मैन पावर) के आधा से ही कार्य लेना है, ऐसा होने से प्रतिदिन साधारण डाक थैला अग्रसारित होते चला गया और इस अराजक स्थिति के लिए कुन्दन कुमार सिंह का तानाशाही रवैया जिम्मेवार सिद्ध हो रहा है। इसकी औचक जाँच (सर्किल) कार्यालय स्तर के पदाधिकारी से करायी जाय। जिससे ऐसी अनियमितता पर लगाम लगाया जा सके। सारे पत्रो का निष्पादन समय से हो सके।
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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया