Wed. Jun 24th, 2026

 

फाईनेंस कर्मी के आवेदन पर एफआईआर दर्

बेतिया: पश्चिम चम्पारण जिला के बेतिया पुलिस अंतर्गत नरकटियागंज स्थित शिकारपुर थाना क्षेत्र के मथुरा चौक स्थित एक फाइनेन्स कंपनी के कर्मी को बंधक बनाकर कतिपय तत्वों ने मारपीट की घटना को अंजाम दिया है। घटना 9 अक्टूबर 2023 की बताई गई है। मामला में फाईनेंस कर्मी, पूर्वी चम्पारण जिला के मोतिहारी पुलिस के छौड़ादानो थाना के बेला गांव निवासी गुड्डू कुमार ने शिकारपुर थाना में एफआईआर दर्ज कराया है। पचमवा गांव निवासी मो राजिउल्लाह को आरोपी किया है। उसपर आरोप है कि वह मथुरा चौक पर स्थित उत्कर्ष स्मॉल फाईनेंस बैंक में कलेक्शन एजेंट है। घटना के दिन वह कलेक्शन को लेकर पचमवा गांव गया, ।गांव में वह घूम घूम कर रुपए की वसूली करने क। क्रम में आरोपी ने उसे घेर लिया और गाली गलौज करते हुए मारपीट किया। आरोपी ने उसे अपने दरवाजे पर बैठाकर बंधक बना लिया। इस बात की जानकारी उसने अपने मैनेजर को दी और मैनेजर ने शिकारपुर थाना को घटना की जानकारी दी। सूचना पर पहूंची शिकारपुर पुलिस ने उसे मुक्त कराया। थानाध्यक्ष रामाश्रय यादव ने बताया कि मामले में एफआईआर दर्जकर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

Spread the love

By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

Leave a Reply

You missed

खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया