Wed. Jun 24th, 2026

बिहार पुलिस की कार्रवाई ने आर एस भट्टी की पुरानी कार्यशैली की याद ताज़ा कर दी

 एस एन श्याम/अनमोल कुमार की रपट

बिहार में बढ़ते अपराध पर अंकुश लगाने की दिशा में नीतीश कुमार की समीक्षा बैठक के बाद बिहार पुलिस, उत्तर प्रदेश पुलिस की नक्शे कदम पर बड़ चली है। जिस प्रकार मुख्यमंत्री योगी की पुलिस अपराधियों को यमलोक पहुंचाने लगी है, ठीक उसी प्रकार बिहार पुलिस ने हाजीपुर में एक सिपाही के हत्यारो को घटना के मात्र 3 घंटे में पुलिस मुठभेड़ में मार गिराया। बताया जाता है कि वैशाली जिला एसपी की सराय थाना की पुलिस टीम नेशनल हाईवे पर बाइक चेकिंग करने के दौरान यूको बैंक के सामने एक बाइक पर 3 युवक संदिग्धवस्था में दिखे। पुलिस को देखते ही वे बाइक छोड़कर भागने लगे। पेट्रोलिंग जिप्सी के एक जवान जान पर खेलकर इन तीनों को खदेड़ने लगा, अचानक भाग रहे युवकों में एक ने सिपाही पर गोली चला दी।  जिससे सिपाही गिर गया, उसे चिकित्सार्थ तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन चिकित्सकों ने सिपाही को मृत घोषित कर दिया। मृत सिपाही अमिताभ कुमार बताया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार पुलिस ने भाग रहे दो अपराधियों को दबोच लिया और उन्हें पूछताछ के लिए ले जाने के क्रम में दोनों युवक पुलिस जिप्सी से कूद कर भागने लगे। पुलिस ने जब उन्हें रोकने की चेतावनी दी तो अचानक पुलिस पर फायरिंग होने लगी। प्रतिक्रिया स्वरुप पुलिस ने जवाब कार्रवाई किया, जिसमें भाग रहे दोनों युवक को मारे गए। पुलिस सूत्रों की माने तो एनकाउंटर में मारे गए दोनों युवक बिट्टू और सत्य प्रकाश बताए गए हैं।

शाबाश… बिहार पुलिस…..। बिहार पुलिस के कप्तान राजविंदर सिंह भट्टी की प्रशंसा नहीं करना बेईमानी होगी। आर एस भट्टी की पुरानी कार्यशैली की याद उपर्युक्त घटना ने ताज़ा कर दी है।

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By Awadhesh Sharma

न्यूज एन व्यूज फॉर नेशन

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खेत बचाओ अभियान अंतर्गत भोजपुर जिला के दो गांव में किसानों को दिया प्रशिक्षण भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना द्वारा संचालित “खेत बचाओ अभियान” के अंतर्गत भोजपुर जिले के सहार प्रखंड के दो गांवों में किसानों के लिए जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, फसल सुरक्षा तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। अभियान के अंतर्गत पहला कार्यक्रम धनछुआ गांव, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें कुल 30 किसानों ने भाग लिया। प्रतिभागियों में 27 पुरुष एवं 3 महिला किसान शामिल थीं। वहीं दूसरा कार्यक्रम कोनी गांव, चौरी पंचायत, सहार प्रखंड, भोजपुर में आयोजित किया गया, जिसमें 31 किसानों ने सहभागिता की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आईसीएआर-पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना से विशेषज्ञगण डॉ. पंकज कुमार, डॉ. मनोज कुमार त्रिपाठी तथा श्री ए.एस. महापात्रा मौजूद थे। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र, आरा के विषय वस्तु विशेषज्ञ डॉ. विकास सिंह मौजूद थे। विशेषज्ञों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करने से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उचित मात्रा में प्राप्त होते हैं, जिससे उत्पादन लागत कम होती है तथा फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग से बचने तथा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने पर बल दिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को हरित खाद के महत्व से भी अवगत कराया गया। वैज्ञानिकों ने बताया कि धैंचा एवं सनई जैसी फसलों का उपयोग हरित खाद के रूप में करने से मिट्टी में जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ती है, मृदा की संरचना में सुधार होता है तथा भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। उन्होंने किसानों को खरीफ मौसम में धैंचा एवं सनई की खेती कर उन्हें खेत में पलटने की तकनीक एवं उसके लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान किसानों की समस्याओं एवं जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को अति उपयोगी बता, ऐसी जागरुकता गतिविधियों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया